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Showing posts from July, 2019

कलियुग

आज इस कलियुग की दास्तान में..
अच्छाई व बुराई की धमासान लड़ाई में..
नेकी, ईमान के साथ की बदसलूकी में..
वफ़ा व बेवफ़ाई के लगते धब्बो में..
जात व धर्म के बेख़ौफ़ युद्ध की रक्तपात में..
प्यार, चाहत व नफरत की भड़कती आग में..
जलते हुवे देखा हमने
सिर्फ एक इंसान को..!!

तब सिर्फ़ एक सवाल
तमाम संवेदना के साथ,
उठा समूचे मन मस्तिष्क में..
वास्तविकता क्या है... आखिर
ये... ये सब इंसान के लिए है ..??
या ये इंसान इनके लिए...??
कहाँ है इंसान
इनसे सुखी...??
फिर क्यों भुगते ये सरदुःखी..??

किस स्वार्थ की प्यास में..
सहना ये जानलेवा,
पीठ पे बोझा, ढोते रहना दुखी कलेवा...??

इस अनकही बेदाग पीड़ा से
रोते तड़पते इंसान को
आज हमने देखा..!!


दो रोटी के
चार टुकडे कमाके
बच्चों का पेट भरना
बस यही तो है मेरा जीवन...!!

कभी कभी तो दवा नहीं,
दुआओं पर ही, बच्चों का बुखार
भी दांव लगाया है..!!

घाव नहीं भूख से
बिलखते जीवन गुजारा है।
जात कहाँ अजी धर्म नहीं,
हमारी तो भूख बला है।
रोटी कपड़ा लड़ाई है।
हमने तो जीते जी
मुर्दों-सा, जीवन जिया है !

सारे कलियुग हमने तो
इंसानों को हर पल
सड़क पर, दम तोड़ते देखा है !!

कलियुग है नहीं सुखासिन
यह त…

अतुकान्त काव्य

हिंदी यह एक विश्व् भाषा है, तथापि हिंदी से अभ्यास तथा ज्ञान की दृष्टि से जिनका सम्बन्ध नही आता, वे हिंदी की महत्ता, गरिमा तथा वास्तव सत्य अस्तित्व को पहचान ही नही पाते।
   अधिक तर राष्ट्रभाषा के रूप में प्रमुख संपर्क भाषा हिंदी को संविधान में महत्वपूर्ण स्थान मिला, तथा अन्य 22 भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा के रूप में गौरवान्वित किया गया। इन भाषाओं में अंतर्गत मात्रा में यह संघर्ष सदैव किसी न किसी दुखती रग के समान कहि भी एवं कभी भी जो छिड़ जाता है।
     कभी साहित्यिक संपदा, कभी भाषिक सौदर्य, कभी व्याकरणिक चोटिया, तो कभी अस्तित्व के निम्न एवं उच्च स्तर को लेकर। हर भाषा जो एक व्यक्ति के विचार दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाती हैं, भावों की स्तरीयता को सिद्ध करती है, वह वास्तव में परिपकव एवं श्रेष्ठ भाषा हैं...!!बच्चे को जन्म देने वाली माँ की कभी योग्यता सिद्ध नहीं की जाती, वो जन्म देकर जो उपकार करती है उसको किसी भी परिमाण, स्तर, पुरस्कार तथा तुलना में बिठाकर स्थापित करने की चेष्ठा करना ही एक तुच्छ प्रयास होगा। उसी प्रकार भाषा भी ईंश्वर की मनुष्य को मिली हुई एक अनोखी अमूल्य शक्ति है, जिसके बगैर विचा…

माझे...

जीवन भर आपण है माझे ते माझे करीत सर्व वस्तु गोला करीत बसतो परंतु जलताना ते सर्व तर एथेच सोडतो मग त्या कमावतो तरी का..?? त्याचा मोह तरी का..?? जर कफ़न पण आपले स्वताचे नसते...!!

या भौतिक जगतात सर्व वस्तु मिलवित आणि त्या वस्तु साठीची विवादात्मक जीवन पद्धति अखेर काय देते..?? काहीच नाही...!!

केवळ मानसिक व भावनिक संघर्ष...!!

   अखेर मात्र माझे ऐसे कोणीच नसते आणि सोबत ही काहीच नसते..!

आयुष्याच्या खड़तर प्रवासात खूप गोष्टी सदैव घडत असतात. काही शिकवून जातात तर काही विचारशील बनवितात. आत्मचिंतन आणि दर्शन यांची भेट घालूनदेतात. सूर्योदयापासून सुर्यास्तापर्यंत या जीवन प्रवाहित ऐसे अनेक जण भेटतात..,

 जे जग आणि जीवन यांची परिभाषा उलगडवून सांगतात फक्त अनुभूतिच्या जीवावर...!!

सगळेच जीवन भराचे सगे सोबती नाही बनत, काही अल्प तर काही दीर्घ हिशोब घेवून येतात, काही विनाकरण त्रास दायक ठरतात तर काही विनाकरण प्रेम दायक ही सिद्ध होतात, काही दिव्यतेच्या गाभार्यात स्थान प्राप्त करतात तर काही नैतिकतेच्या रासातळाला ही जावून बस्तात.. खूप जण आपल्या अगदी सहज जवळ येतात आणि अगदी सहज दुरावतातही..!! कितीतरी व्यक्ति विश्वास आ…

हम भी धीरे धीरे

चाहने लगे उनको हम भी धीरे धीरे हाँ हो चुके उनके तो हम भी धीरे धीरे।
नकारा भी जाए ना ये आशियाना दिल का..।। खो गए बाहो में उनके हम भी धीरे धीरे।
फ़साना आशक़ी का न बनाना था हमको..।। बाजी इश्क़ की ही  हारे हम भी धीरे धीरे ।।
नुरे मोहोब्बत कभी बनना था हमको..।। टूटे संजीदगी के द्वारे हम भी धीरे धीरे।।
सबका होकर ही रहना था हमको..।। हाय कम्बख्त मेरा भी हुवा धीरे धीरे।।
- वृषाली सानप काळे

नारी शक्ति

सभी प्यारी प्यारी सहेलियों को मेरा प्रेम युक्त नमस्ते...!!
आज महिलादिन के शुभ अवसर पर ढेर सारी बधाईया...!!
नारी शक्ति को सलाम🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
नारी शक्ति
*********************
 तेरे हाथों जिंदगी की कहानी बनेगी
नारी है नारी तू ही एक रवानी बनेगी...!!

सांसे से ही लहरे रोक लो
दुर्बलों के ही सहारे बन लो
डूबती कश्तियाँ तू ही संवारेगी
तेरे हाथों...

तेरी शक्ति को दे परस्तिश
तेरी मुक्ति पे नाही बंदिश
खुद के संग जग की जंजीरे
चुनवायेगी
तेरे हाथो...

तू ईश्वरीय शक्ति का है प्रतिरूप
चन्दन सा जी कर बनी है धूप
पवित्रता की अग्नि से आत्मा को परखेगी...!!
तेरे हाथों....

- वृषाली सानप काले

हिंदी कविता

साजन क्यों तरसाये जिंदगी हमे क्या बतलाये साथिया तुम्हे...
क्यों भर आये अश्क़ ये सुने क्यों हुवे तेज ये धड़कने..
ये खाती मर्यादा हमेशा हमे उलझन में ही डुबाये हमे..
जैसे भँवर में फँसी कश्ती उजाड़े ही भावना की बस्ती..
साँसे संग हर आह तुम्हारी दिखाऊ है कर्जदार तुम्हारी...
चाहत इबादत इनायत भी संस्कारो की है इजाज़त भी...
खुदा के साथ तुम्हारी भी ऋणी है सारी जिंदगी भी..
जग को हो अमान्य फिर भी तू मेरी इज्ज़त है मोहोब्बत भी...!!
हक वफ़ा की चाहत तेरी पूजे हर आदत हम तेरी..
रिश्ते कर्मो से बंधे हमारे हम बंधे जज्बातों से तुम्हारे...!!
बड़े कच्चे जग के सारे धागे हम न तेरी मोहोब्बत से भागे..!!
निभाना अपनी वफ़ा के वादे पाकिज है साजन मेरे इरादे...!! 🙏 वृषाली सानप काळे

पहेली

एक अजीब पहेली हुं मैं जितना सुलझावोगे उतनी उलझुंगि मैं जितना भी खोलोगे।
वो पहेली ही रहनी होगी वरना दुनिया टूटेगी पहेली गर ये सुलझेगी तो रिस्तो को बिखेरेगी।
कुछ कड़वे सच खोलेगी तो गुलिस्तो को तोड़ेगी जब महकेंगे फूल सारे तो कांटे भी मुरझायेगी। 🤔 - वृषाली सानप काळे

अब तेरे....

न पालो सीने में गम हाँ है हम तेरे सनम.. न जज्बात से हो नम हर साँस से तेरे सनम..।।
लाख चाहा के दूर हो पर देख इतने मजबूर हो.. कोशिश बेकार सब हो माना तुम मेरे ही हो..।।
सारे तत्व आदर्श हारे बेकार चाहत के मारे ढूंढे बस तेरे सहारे पहुंचे तेरे ही द्वारे..।।
थक हाथ ही जोड़े हम अब हमे अपनाओ तुम.. तन मन से कुर्बान हम काँधे दो अपने सजन...।।
- वृषाली सानप काळे

एक कविता मेरी

हिंदी की सेवा में एक कविता मेरी
राष्ट्र की पूजा में एक अर्चना मेरी।
भाषा की प्रार्थना में एक आराधना मेरी।
भारत की पहचान में एक साधना मेरी।
हिंदी की महत्ता में एक जिज्ञासा मेरी।
राष्ट्रीयता की धरोहर में एक याचिका मेरी।
भाषिकता के विवादों में एक मुलाईजा मेरी।
प्रांतीयता की घोषणा में एक संवेदना मेरी।
हिन्दुस्थान की मिट्ट में एक मुरलिया मेरी। 🌹 - वृषाली सानप काळे

खामोशी

मिलन की प्यास बढ़ेगी इसलिए अपनाई बेरुखी तड़प ही करीब लायेगी इसलिए अपनाई ख़ामोशी।।
दिलों का तो हुवा मिलन आत्मा को भी संजीवन अब कैसी है अड़चन जब बना है तू साजन ।।
रुत बदली है बदलेगी सुध निकली है निकलेगी रुख बदली है सुधरेगी परत उजली है उजलेगी।
भरोसे पे ही चले जहाँ क्यों शको का फासला वहाँ जिंदादिली की है बात यहाँ आ बाहो में बस जा जानेजाँ ।। 🌷 - वृषाली सानप काळे

बेहद

हर बीते नाज़ुक पल में सदा रहे शेष कोई मन में 
हल्के से जो आये मन में  छू ले छुपाए हमे सीने में
हक जताये दिल के घर में  खेले, कूदे, लड़े पल पल में
न मैं न वो मालिक घर में  दोनों भी मेहमा खुद के घर में 
न कोई स्वार्थ की आशा में न शिकायत कोई निराशा में
नाजुक भाषा समझे पल में बस ये दो दिल, दिल ही दिल में ...!!
यही तो इश्क के रंग में अद्वैत बनाये पल ही पल में..!!
बेहद को बेहद की अदा में बेहद से बेहद गन्ध दे पल में..!!
अनमोल क़ीमत भर दे मन में  कस्तूरी सा पावन महके मन में ..!
शायद अमिट जाने मन में  एकांग, अद्वैत प्राण हम है हम में..!! *** - वृषाली सानप काले

सम्मोहन

सम्मोहन एक शक्ति है..!! एक अद्वितीय कला है, जिसकी सहायता से हम हर असम्भव कार्य को संभव कर सकते है।

   लेकिन ये सम्मोहन आखिर है क्या..?? मनुष्य तथा अन्य सृष्टि के बीच का लगाव एक सम्मोहन ही तो है। एक दूसरे से प्रेम भी सम्मोहन ही तो है। किसी भी बात की नशा भी तो एक सम्मोहन ही है।

 जब भी हमारा मन, हमारी आँखे किसी सुंदर चित्र या वस्तु को देखता है तो स्वतः अपने आप एकाग्र होता चला जाता है, तथा अनायास उस चीज के प्रति खींचते चले जाते है, यही तो है सम्मोहन..!!

    कई बार ये भी तो होता है कि हम जीवन मे कोई एक ऐसा पाते है कि केवल उसकी बात हम स्नायास सुनते जाते है। जो हमें निरन्तर सुझाव देता चला जाता है, जिसके हम प्रभाव में आ कर अपने आप उसका कहना मानते चले जाते है बिना किसी दबाव के..!! ये सम्मोहन ही है।

    सम्मोहन जीवन के लिए जिंदगी के लिए आवश्यक भी है, परन्तु ये भी आवश्यक है कि हम किस बात के प्रति सम्मोहित हो रहे है...??अगर हम ज़रा भी किसी व्यक्ति, वस्तु, पदार्थ वा वैभव, प्रणय कि तरफ़ आकर्षित हो रहे है। तो यह उनकी सम्मोहन शक्ति के कारण ही हो रहा है, बिल्कुल। तब ये सोचना एवं जानना भी जरूरी है कि …

હૃદયનું ઝરણું

સપના માં તો રોજ આવો..  હકીકત માં આવો કોઈ દી હું કોઈ લેખક નથી પણ..  તમને આનો હુનર સારો 👣 મને હતું કે તમે કરશો..  અલક-મલક ની વાત  પણ તમે તો જાણે મૂંગી,  તસવીર બનીને બેસી ગયા..  👣 મારાં અનુભવો, ઘટનાઓ..  એવાં કે જેનો કોઈ ક્રમ નથી  બસ તારાં વિચારોથી આબાદ મારી દિલ ની સમગ્ર દુનિયા  👣 - 'અનજાન મુસાફિર'

મુક્તક રચના

તમારી આંખોની શરારત યાદ આવી જયારે પહેલી મુલાકાત થઈ ત્યારની તારી સાથે વિતાવેલી ક્ષણોની યાદ ઝરણું બનીને હૃદયમાંથી નીકળે છે --------- મૈં તો સફર માં જ માનું છું સાથી સફરમાં જ તો જ્ઞાન છે સાંપડયું જ્ઞાન લેવાં થી અનુભવ થાય છે તું બની છે રાધા, ને મેં બનું કૃષ્ણ --------- તારાં બધાં સવાલ નો જવાબ તું છે તારાં પ્રત્યે પ્રીત બંધાયેલી છે એટલે આવી તારી લાગણીઓનાં પ્રવાહમાં પાછો ડૂબકી લગાવી પામું તારો પ્રેમ --------- - 'Anjan Musafir'

साथी

कुछ तो मजबूरियाँ है जीवन में साथी,
तेरी जुदाई से प्यार किस को है जाना
🌹 तेरे दिल में रहेंगे, एक याद बनकर तेरे लब पे सजेंगे, मुस्कान बनकर 
🌹
कभी मुझे अपने से, जुदा मत समझना  तेरे साथ चलेंगे, आसमान बनकर
🌹
-
'अनजान मुसाफ़िर'

हम ही किसीके हो न सके

हमने तो कुछ न चाहा रब से तेरे पहले बस मागु मौत कब से।
हमने तो कुछ न चाहा रब से तुझसे चाहू सारे गम मैं कब से।
हमने तो कुछ न चाहा रब से जीवन हो शुरू बस तेरे दम से।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से दे दू दुवा मैं तुम्हे हर महफ़िल से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से तू मेरा बस बनी धरती ये जब से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से हम एक दूजे के है लाख जन्म से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से तरसे मेरी साँसे मिलन को कब से
धरती बनी ये शायद जब से तेरे पहले चाहू मौत मैं कब से..। 🌴 वृषाली सानप काळे

कसूर

तुझे चाहा क्या कसूर किया तुझे पूजा ये कबुल किया। तेरा सब दिन दीदार किया प्यार तेरा एख्तिहार किया।।
तू रूठा तो ले पानी बने तू टूटा तो ले सुई बने तू झूठा तो ले धागा बने तू पराया तो ले सगा बने जीव तुम पर कुर्बान किया।।
तू पत्थर तो मैं लोहा बनु तो परिस तो मैं सोना बनु तू मिटटी तो मैं बीज बनु तू भट्टी तो मै मद्य बनु।। तुम पर तन भी साभार किया। 🏵️ वृषाली सानप काळे

बाजी

लम्हा-लम्हा भी बीत चूका तनहा तनहा सी लिख चूका...
अतित फिर न आ सका इतिहास को दफना सका..
क्यों सपनो का रंग फीका क्यों अपनों का संग बिता...
कथनी का सब खेल रुका करनी का अब मेल जीता..
आ जीवन का रूप दिखा ला प्रेम का प्रारूप सीखा...!!
जग को कदमों पे झुका अब ना हो कोई भूखा...!!
नया ये इतिहास लिखा लकीरों को तक़दीर सीखा....!!
- वृषाली सानप काळे

याद

तुम्हें भूलने की कोशिश में तुम याद ही आते गए..।।
तुम्हे सुनने की कोशीश मे दिल आबाद ही करते गए...।।
जान मेरी तो ले जाएगा ये जुदाई का हसी तेज़ाब..।।
बेवफ़ा यु फँसा ही जाएगा तेरी वफाई का ये नक़ाब...।।
यादो के भूचाल से न टूटो यादो को सदा ही तुम लुटो .।।
यादो में ही प्यार, समझो यादो में ही दिलदार ढूंढ़ो।।
पर आहो को साथी कभी ना बढ़ाना तुम..।।
हर आहो को मनाना देखो साँसों को न भूलना तुम..।।
तेरी फूलों को हम तो सजदे में सदा बिठाए है..।।
तेरे शेरो से ही तो हरदम हम राहो को सजाये है...।
- वृषाली सानप काळे

इल्तजा

रंग में रंगने की है इल्तजा भंग न करना रे ये प्रार्थना। ज्योत हुं दिए की तू मेरी आभा गहराई नाप लो मैं तेरा गाभा अद्वैत दोनों ना शमा न परवाना।। रिश्ता है पीड़ा दर्द की भाषा जिस्म है सजा एक है आत्मा अमर्त्य जीवन ही अभिलाषा।। रंग न कोई दंभ न कोई संग न कोई साथ न कोई श्याम हो मेरे अब मैं बनु राधा।। 🍁 वृषाली सानप काळे

पर....

जग सोया भी नहीं पर सोया है
रब रोया भी नहीं पर रोया है..!!

गीत गाया भी नहीं पर गाया है
सब खोया भी नहीं पर खोया है।

गम देखा भी नहीं पर देखा है
कब्र लिए भी नहीं पर लिखा है।

नम नेत्र किया भी नहीं पर किया
सब थम गया ही नहीं पर गया है..।

रंग छुटा भी नहीं पर छुया है
संग रूठा भी नहीं पर खोया है..।

अंग टूटा ही नहीं पर टूटा है
मन मिटा ही नहीं पर मिटा है।

तभी तो सब लूटा ही लूटा है
तभी हर जंग में हम मिटा है।

- वृषाली सानप काळे

मिलन

पढ़ना जरा गौर से वेदना के वेद को
रखना जरा तौर से कामना के वेद को।।

मचल जाए भी आतंक खेलने को
फिर भी बहा देना बवंडर के लेद को।।

न करो प्रेम जिश्म भरे लाश को
जरा सा तो समझो मन के भेद को।।

जमाने है गुजरे पूजने विवेक को
खरा खरा ही रखो आत्मिक अभेद को।।

सुनो उस मिलन से मिलो मन मेल को
नहीं आस कोई अब शरीर संवेद को।।
🌲🌲🌲
- वृषाली सानप काळे

न करो ऐसे

न करो ऐसे करतब..  के खफ़ होे जाए हम..।।
न भरो ऐसे पनघट के आहो से भर जाए हम।।
न डरो ऐसे हमदम के सहम हि जाए हम..।।
न हारो ऐसे प्रियतम के मर ही न जाए हम..।।
न गिनो ऐसे पतझड़ के मौसम में बिखर जाए हम..।।
न लिखो ऐसे आफताब के जल ही जाए हम...।।
न छूवो ऐसे दामन के बेशरम होये हम..।।
न मलो ऐसे कागज के मिट जाए ही हम..।। 🌲 वृषाली सानप काळे

तनहा

मेहसूस नहीं था की तन्हा हु आजकल तुमने सवाल छेड़कर अच्छा न किया।।
एहसास नहीं था की दिल रोता है अक्सर तुमने खरोचे निकालकर अच्छा नहीं किया।
शिकवा नहीं था इन रंजो गम का शायद तुमने घावो को रौंदकर अच्छा नहीं किया।
गीला नहीं था भले बाज था ये जीवन तुमने फांसा फेंककर अच्छा नहीं किया।।
दाग नहीं था की बेदाग़ ही है जीवन तूने ताने बेतुके कसकर अच्छा नहीं किया।।
इल्ज़ाम नही थी पर फक्र था खुद पर तुमने दुश्मनी जताकर अच्छा नहीं किया।।
जीना तो नहीं था हमे मरना ही तो था तुमने जीते जी मारकर अच्छा नहीं किया।। 💎 - वृषाली सानप काळे

हे ईश्वर तू ज्ञान सीखा दे...

मंदिर बांटा मस्जिद बांटा बाँट भी चुके भगवान को.. हे ईश्वर तू ज्ञान सीखा दो इस नादान बने इंसान को...।।
आचार विचार व्यवहार से ही ये पहचाने धर्म को.. ये बँटवाये साक्षात सभी जीवन के भी हर कर्म को.. अरे धर्म बांटा, कर्म बांटा बांट चूका है कर्म काण्ड को.. हे ईश्वर तू...... ।।1।।
प्रांत-प्रांत के विभेद से तो इसने बँटवाई जमीन भी... बाँट चुके सारा अमन भी दुनिया भी बनी सारी अंधी.. अरे जमीन बाँटी, अम्बर भी बाँटा, बाँट चुके इंसान को.. हे ईश्वर तू... ।।2।
पूजा से पहचाने प्रथा को, सब बंटवाए भूले ये इंसान.. तन का कपडा, पोशाख ये आज बनी इनकी पहचान.. अरे पूजा बाँटी, प्रथा बाँटी अरे बाँट चुके पोशाख को... हे ईश्वर तू.. ।।3।।
बस जाँत, भाषा, धर्म, प्रांत के बिच पीसे सारे साहित्य.. विधा के बँटवारे से जन्मे प्रांतीयता का हर आदित्य.. अरे विधा बांटी, कथा बाँटी बाँट चुके है हर भाषा को.. हे ईश्वर तू.. ।।4।
पूजन से ही जन्मे कारण यहाँ सबने है तन भी बांटा.. भक्ति का साधन है जो मन पर अंधेपन में मन भी बांटा... अरे तन भी बांटा, मन भी बांटा, बाँट चुके है ईमान को.. हे ईश्वर तू ज्ञान सीखा दो इस नादान इंसान को...।।
वृषाल…

जीवन रास ना आए

गुरु बिन जीवन रास न आये गुरु पाये तो सारा जग पाये..।।
गुरु अंधे की लाठी जैसा गुरु कस्बे की माटी जैसा मिट-मिट कर जो उपज लगाए.. गुरु पाये तो सारा जग पाये..।।
गुरु शिष्य का नाता ही ऐसा कुम्हार मिटटी का रिश्ता जैसा मार मार के नेक मूरत जो बनाये गुरु बिन जीवन रास ना आये..।।
गुरु मिले तो चारो धाम हमारे गुरु होले तो सत जन्म हमारे गुरु से युगों की भी पूंजी पाये.. गुरु बिन जीवन रास ना आये..।। 💐🙏💐 - वृषाली सानप काळे

घर अपने जा तू आत्मा

इस तन ने तुमको क्या दिया अब घर अपने जा तू आत्मा..!!
कभी धागा टुटा रे रिश्ता टुटा हर परिक्षा में रे तेरा सब्र लूटा अब कर भी दे तू इसका खात्मा। अब घर अपने जा तू आत्मा।।
तन के कर्म में ये मन था सर्द क्या झाड़ता तू रे उसकी गर्द अब न बन तू उसका रे बालमा । अब घर अपने जा तू आत्मा।।
सिद्धान्त तथा व्यवहार के बिच आदर्श में था आचार भी सच पर होता ही गया तेरा खात्मा।। अब घर अपने जा तू आत्मा।।
तेरी सादगी से तो ये तन बचे तेरी बंदगी से ही ये मन बचे पर तनमन न गाये तेरा चालीसा अब घर अपने जा तू आत्मा।। ⭐ - वृषाली सानप काळे

बाप

किसको क्या समझाए क्या होती है ये कसक.. बाप बिना दुनिया में ओलाद की हालत...।।
पग पग पे हो संघर्ष या फिर हो जाए हर्ष कमजोर ही पड़ती है उसे सहने की ताकत..।। बाप बिना दुनिया में..
जहाँ बनता है हैवान ओर जीवन कब्रस्थान.. एक अनाथ का सबब ना ला पाये रिस्तो में दमक..।। बाप बिना दुनिया में..
मिले पैसा ताकत, स्वर्ग अनोखा है उसका वर्ग.. उस हिमालय व्यतिरिक्त बने जीवन भी आफत..।। बाप बिना दुनिया में...
बाप ही होता है खिवैया तारे उसकी जीवन नैया कोई क्या दिलाये बाप क्या बाप की भी क़ीमत..।
क्या समझाए कीसको कया होती है कसक.. बाप बिना दुनिया में.. 💐 - वृषाली सानप काळे

शर्त

कोई शर्त होती नहीं प्यार में न प्यार शर्तों पे किया हमने...।।
कोई दर्द टिकता नहीं प्यार में न दर्द से नाता जोड़ा था हमने..।
कभी सर्द हवा को छुवा यार ने न मौसम से दिल लगाया हमने।
किसी मर्ज से दिल ही नहीं माने दिल्लगी को न सजाया तुमने..।
चाहत में वफ़ा को ही पुजा हमने क्यों शर्तों का इल्ज़ाम लगाया तुमने।
ईमान वफ़ा को ही अपनाया हमने न टिकने की बद्दुआ कहा तुमने..?? ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काळे

गुरु

अंतर्मुख तथा गंभीरता से सिखलाए बनो तुम निरहंकारी..।
गुरु ही तो जीवन धारा की भवसागर से नैया पार करी..।
बन सच्चा मधुर तू  सेवाधारी न गाये महिमा न अहंकारी..।
सहनशीलता का कुशल व्यापारी गुरु बिन कौन यह व्रत आचारी.।
गुरु ज्ञान सागर मैं तो एक सिंधु गुरु पुरवैय्या मैं तो एक बिंदु...।
गुरु भास्कर सम मैं तो दीपक हु गुरु महत्तम मैं तो नतमस्तक हु.।
ऋण ऋण में तेरे तो मैं डूबा हु कण कण गुरु का अब हिस्सा हु। ~~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काले

जरुरी है

जिंदगी को जीने के लिए, एक मुलाक़ात जरुरी है..।।
ताजगी को निभाने के लिए अब महकियात जरुरी है..।।
बंदगी को जताने के लिए अश्क़ो की बरसात जरुरी है..।।
सादगी को बताने के लिए प्रीत के सादे अल्फाज़ जरुरी है.।।
पाकीजगी के खाते के लिए अब इबादत ही जरुरी है..।।
आवारगी को मिटाने के लिए अब तहकीकात जरुरी है...।।
दोस्ती को निभाने के लिए अब थोड़ी मोहोब्बत जरुरी है..।।
आशक़ी में मरने के लिए अब चाहत की अदावत जरुरी है..।। ~~~~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काले

भोगी

कर्म सिद्धांत परिक्षा ही लेगा योग सिद्धांत तपा ही देगा
भोग सिद्धांत रमा ही लेगा सन्यस्तता वीराना ही देगा
रम जा तो फिर जानेगा जीवन सफल तब मानेगा
ज्ञान ज्ञानी वित् राम रागी विरक्तता ही सम्मान देगी
संभव असंभव झुल्सायेगी आशा निराशा भरमायेगी
नित दिन साधक बन रोगी तभी मुक्ति भोग से होगी..।। ⭐ - वृषाली सानप काले

खुद की खुद के लिए रूहानी सेवा

मैं अत्यंत पवित्र आत्मा हु। मैं शक्ति स्वरूप आत्मा हु। मैं आत्मा इस देह की मालिक हु। मैं, इस देह की मालिक आत्मा इस देह में स्थित समस्त भटकती हुई सूक्ष्म अति सूक्ष्म आत्माओ को आदेश देती हूं, इस देह से बाहर निकलो। इस देह में रहकर कोई भी फायदा नहीं। ऐसे भटकते रहने से बेहतर मुक्ति पाओ। तुमको मुक्ति केवल परमपिता परमात्मा देगा। अन्य कोई भी न राा,म न कृष्ण, न सीताा, न राधा, न हनुमान, न जगदम्बा कोई भी तुमको मुक्ति नहीं दे सकता।
परमात्मा से डरो नहीं। वो किसीको सजा नहीं देता वो तो प्रेम का सागर है। वो प्यार देता है, दुख हर्ता व सुख करता है। मनुष्य के कर्म उसको दुख देते है।
समस्त भटकती आत्माओ निकलो, आंखों से, माथे से, चेहरे से, गले से, गालों से, भृकुटि से, हर जगह से निकलो जाओ आसमान के पास जाओ। आगे बढ़ो। सीधे आगे चलो। परमात्मा से माफी मांगो वो जन्म जन्मानन्तर की तमाम गलतियों के लिए तुम्हें माफ कर देगा।
जाओ आत्माओ मुक्ति हासिल करो। खुदा मुक्ति बांट रहा है। संगम युग में ही मुक्ति मिलती है।अन्य किसी भी जन्म में मुक्ति नही मिलती। खुद ही खुद पर कृपा करो। उठो आत्माओ उठो, मुक्ति की डगर पर आगे बढ़ो।
ओम शां…

किस्मत

जल्द असर करती है तेरी दुआ  मुश्किलों से उभरी शख्सियत कहती है
कैसे कहे, हम अब उससे किस तरह हमें अक्सर किस्मत की तलाश रहती है
माँगू मन्नत खुद के लिये कभी फ़रियाद वक्त के सितम सहती है
हँसना चाहती हूँ खुलकर मैं वो मेरे आँसुओ में बहती है
करती है पूरी ख़्वाहिश तब मेरी जब रूह मुझसे 'अलविदा'  कहती है 🌹 - स्नेहा कोळगे

तेरी कहानी

शाखों के पत्ते कहते है
मुझसे तेरी कहानी...
दूर चली आती हूँ
उनसे मैं...
मुझे आज भी
तुझसे पुरानी
शिकायत है...

गिरनेे लगते है पत्ते
फिर शाखों से...
हवा के झोंको से
इर्द गिर्द घूमते घूमते
टकराते है...
पैरोंसे...

विरान हो जाती
है, वो डालियाँ
मगर वो पत्ते
मेरा रुख करते है..
कहते है डलियों से
रुको...उसे..
मनाकर आते है...

मेरा गुस्सा
बन बैठता है
मेरा ग़ुरूर...
पत्तों से छलकता है
तेरी चाहत का नूर...

रुक  जाती हूँ मैं
इक पेड़ की छायातले
टप टप करती बारिश की
बूँदो को, हाथों में
समेटने के लिए
लेकिन...
फिर इक पत्ता
आता है हथेली पर
तेरा जिक्र करने के लिए...

याद आते है वो लफ्ज ,
जो तूने कहे थे
इकरार-ए-मोहब्बत में
रखा है...
वो बेशकीमती तोहफा ...
सहेजकर...
इक सुखा पत्ता
ले रहा है साँसे..
बंद किताब में...

©स्नेहा कोळगे

सिया की मौन पीड़ा

सुनो..
राम के दूत आये हैं तुम्हे समझाने..
अब तो समझ जाओ..
कर दो माफ..मान जाओ..

मैं मान तो जाऊँ..
मगर ..
लव-कुश को कैसे समझाऊँ..
उनका छूटा बचपन कहाँ से लाऊँ..

सिखाया गया उन सभी स्त्रियों को
सीता जैसा बनना...
उनकी पीड़ा देखकर
कैसे चुप रह जाऊँ?..

क्यों चलू मैं उस राम के साथ
एक पल भी..
जो लेता रहा मेरे चरित्र की परीक्षा..
हर मोड़ पर .. सब कुछ जानकर ..
माना मैंने सिर्फ उनसे प्रेम किया..
पूरा जीवन उनके लिए समर्पित किया..
लेकिन .. अपनी पीड़ा उन्हें क्यों सुनाऊँ..
बेकसूर होते हुए..
दोषी की तरह क्यों झुक जाऊँ?..

वो तो राजा राम हैं..
सिया के राम नहीं..
जी लेगी सिया राम के बिना..
उसका चरित्र..
उसका व्यक्तित्व..
सिर्फ उसका हैं..
किसी और के नाम नहीं..

©®स्नेहा..

जन्मों का फेरा

मतलबी दुनिया मे जन्मकर बस मतलब न सिख सके
हिसाब चुकता कर ले ..
अब ऐ दिल..
तमाम जिंदगी के
कहकर थोड़ा सा
खिलती धूप की लहरों की
खुशी में चहकते पंछी
की तरह हम भी
परो को फड़फड़ाने निकले..!!

अगले पिछले सारे हिसाब
मिटाने थे हमें
तमाम उम्र के...
यू कहो कि जन्मजन्मांतर के...!!

सदियों से दिल मे दबाकर
रखी हुई कुछ दुख की
कुछ सुख की
कुछ अंनबन की
कुछ कण कण की,
अल्फाजो के दरमियान
तोड़कर कह गए राजे दिल...!!

कह गए बस कह गए...
बिना थके बिना रुके...
अब तक था जो जो सह गए...!!
हिसाब के हिसाबी बनने
की जिद में
न जाने क्या कितना बह गए..!!
जो बोले सो निहाल ही रहे
पर शायद तुझे रुला ही गए

दिल की कही जान पर बनी
नजरो में तेरी ले आये नमी
मेरी भी तो आंख कहाँ थी थमी
तू क्या जाने मेरे भावों की जमी

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती पे कुर्बान
मेरी आन,बान,शान,मान
तू वजूद मेरा तू मसीहा मेरा
पर चुकाना तो था जन्मों का फेरा

बस इतना बता दे जरा
क्या गिर गए तेरी नजरो में हम..??
क्या फिर गए अपनी वादों से हम..??
क्या मिट गए तेरी दोस्ती से हम..??
या चूक गए अपनी चाहत में हम..??

- वृषाली सानप काले

रिश्ता

रिश्तों ने हमको किया न गवारा
या रिश्तों का हमे मिला न सहारा..।

न बना कोई रिश्ता पाक हमारा
या रिश्ते में रिश्तेदार न था न्यारा...।

रिश्ते ने रुलाया तड़पाया हमे
फ़रिश्ते सा न कभी सजाया हमे..।

रिश्ते ने सदा ही आजमाया हमे
काँटो पथ पर ही चलाया हमे..।

मजाक सा जग ने देखा नजारा
रिश्ते ने हमको किया न गवारा..।।

जग क्या हमे आजमाता रुलाता
आत्मिक शक्ति को क्या सुलाता..।

न था किसमे दम के तड़पाता
अपने उसूलोसे हमे पहचानता..।

रिश्तों की दरिंदगी ने हमे मारा
रिश्ते ने हमको किया न गवारा...।।

जग पूछे अश्क़ो का बोलो कारण
रब कहे जी लो मैं हु ना तारण..।

सब कहे स्वार्थ से भरो आँगन
नैतिकता की तो मैं हु पुजारन..।

रिश्तों की बदनामी है न गवारा
रिश्तों ने हमको किया न गवारा..।।

जंग अपनों से लढके दिल ये टूटा
रंग सभीकें देखमहफ़िल से रूठा..।

संग न पाके जीवन से बेरुखा
भीख न दया न चाहे कुछ झूठा...।

हम चाहे रिश्तों से मूल्य हमारा
रिश्तों ने हमको किया न गवारा..।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
- वृषाली सानप काले

रूहानी मोहब्बत

वो माँगे हमसे बस प्यार जिस्मानी
हम माँगे सदा इख़्ति हार रूहानी ।

वो सुनाये किस्से वादे पैमानी
हम दिखाए उन्हें राहे दीवानी।

हम कहते ही रहे रूह रूह को चाहे
रूह के मिलन से परम आत्मा बने।

जिस्मानी मोह से इनको बचाये
रूहानी चाहत सबकी बढाए।

वो जिस्म तक क्यों रुके ऐ खुदा
हम कैसे समझाए ये होये बूढ़ा।

वो जिस्म को ही माने के आत्मा
हम बताये के ये बस घर बालमा।

वो आलंबन वफ़ा ओर देहिक वास्ते
हम गर्दिशों में जताए रूहानी फ़रिश्ते।

वो जिस्मानी मिलन में ढूंढे तादात्म्य
हम रूहानी वफ़ा में चाहे अध्यात्म।
~~~~~~~~~~~~~~~~
- वृषाली सानप काले
~~~~~~~~~~~~~~~

प्यार

प्यार से ही कहो साथी बना दो मुझको बाती...।। प्यार प्यार सिखाये भी हँसना तथा रोना भी..।।
   प्यार कब किया जाए   ये तो बस हो ही जाए..।।   जैसे सूरज की लाली   जैसे रुत सावन वाली..।।
बेमिसाल जज्बात  भावनाओं की सौगात..।। ख़ुशनुमा एहसास प्यार जीने का अंदाज...!!
  ये तो दुनिया की ताकत ये फरिश्तों की चाहत..।।   ये सुकुन सजी जिंदगी ये जुगनू की लौ बंदगी...!!
डूबने से ही मिले जन्नत किनारे क्या लोगे उल्फत...?? छु लो बनो करो इनायत खुदा की प्यारी  मोहोब्बत..!! ~~~~~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काले

प्यासी ही प्यासी

ये आँख का दरिया क्या पी लोगे बोलो बहता है समुन्दर मुस्कान से घोलो...!!
मेरे आँख का पानी ना सुने करे मनमानी क्या कहूँ मैं कहानी बस जलती रवानी..।।
किसको कह दू दोषी किसकी मैं बनु रोषी हर साथ भी आभासी मैं तो प्यासी ही प्यासी...।।
ज़ख्मों का न मरहम दर्द का न हमदम अब निकलेगा दम मन पे ही गिरा है बम...।।
स्वार्थी महफ़िल में हम थके झेलकर ग़म  घाव अपनों के सनम किससे न्याय मांगे हम...।। ~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काले

लकीरे खुद लिखूंगी

दूसरे क्यों दे दे प्रमाणपत्र मुझे की मैं कौन हुं..??जब मैं बखूबी से जानू कि मैं कौन हुं...?? दुसरोने...हां दुसरोने ..दी हुई ये समस्त सीमा रेखायें.. क्यों इनमें बंदिस्त रहूं ..?? क्यों न मेरे ही पंखो की उड़ान का अनिवार आशिया मैं खुद बना दू..?? मैं जानू.. जीवन का राज, साज, ताज बज-बजकर बना पखवाज..!! अतीत तथा भविष्य क्यों थामू..? क्यों न इच्छित भविष्य निर्माण की इच्छाशक्ति से वर्तमान को सवारु....?? काबिलियत के भरोसे ही जी लू क्यों किसीके सहारे ले लू..?? बादशाह नहीं पर क्यों भिखारी सा जी लू...?? है यकीन बुरी नहीं बन सकती। बनूंगी भी तो नहीं... पर परिणामों से भागूंगी नही.., सदैव लढुंगी..!! हां यदि.. सहने की शक्ति है तो लढने की भी है..!! है स्वीकार भी.., पट तथा जित दोनों भी न होंगे मेरे कभी भी..!! पर पल निकलने के बाद अब पछतावा नहीं करुँगी...!! हाथों की लकीरे अगर किस्मत है तो अपनी लकीरें मैं खुद लिखूंगी...!! लकीरे मैं खुद लिखूंगी..!!
- वृषाली सानप काळे

रंग गई

तेरी सारी शिकायते अब काफूर हो गई.. ऐ री बेवफा जिंदगी मुझे मोहोब्बत हो गई..।।
मेरी सारी संजीदगी करने लगी  बन्दगी.. उलझनो सी थी तुम तुमसे इनायत हो गई...।।
सारे अडिग सिद्धांत बने तेरे उपादांत... अमर्याद असम्भव पर तू मेरी हो गई..।।
नही सोचा तुम संग जीवन लाएगा रंग.. पर कैसे अब तेरे ही रंग में रंग गई..।। ~~~~~~~~~~~~ - वृषाली सानप काले

अगले जन्म में हम न मिलेंगे

सारे हिसाब हम पूरे करेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे...!!
जो हो सो वो सब सह लेंगे अब ना कभी भी आंसू बहेंगे.. अगले जन्म में हम न मिलेंगे...!!
रिश्तो के कश्ती पार करेंगे प्यार भी तुमको पूरा करेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे...!!
किस्से कहानियों में बसेंगे.  खोने से अब तुम्हे तो हम डरेंगे.. अगले जन्म में हम न मिलेंगे..!!
तेरे लिए ही तो आहे भरेंगे तुझपर ही तो हम मरेंगे.. अगले जन्म में हम न मिलेंगे..!!
सारे ही वादे पूरे करेंगे.. मुश्किलों से नाही डरेंगे.. अगले जन्म में हम न मिलेंगे.. सारे हिसाब हम चुकतु करेंगे..!!
जन्म मरण की भी बात कहेंगे सत्य ज्ञान की ही राह बनेंगे खुदा के बन्दे खुदाई ही करेंगे...!! सारे हिसाब हम पूरे करेंगे..
सारे दुश्मनों तुमको मिलेंगे एक एक ज़ख्म को सिलेंगे दुश्मनी के लिए मिसाल बनेंगे..!! पर...अगले जन्म में हम ना मिलेंगे...!! सुनो...अगले जन्म में हम ना मिलेंगे...!!
- वृषाली सानप काले

हम न मिलेंगे

सारे हिसाब हम पूरे करेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे...!!
जो हो सो वो सब सह लेंगे अब ना कभी आंसू बहेंगे.. अगले जन्म में हम न मिलेंगे
रिश्तो के कश्ती पार करेंगे प्यार भी तुमको पूरा करेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे
किस्से कहानियों में बसेंगे खोने से अब तुम्हे तो हम डरेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे
तेरे लिए ही आहे तो भरेंगे तुझपर ही तो हम मरेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे
सारे ही वादे पूरे करेंगे मुश्किलों से नाही डरेंगे अगले जन्म में हम न मिलेंगे
(अपूर्ण)
- वृषाली सानप काले

बाँसुरी

क्या करूँ के बनू मैं बांसुरी तुमरी
प्रियतम प्यारी बनूँ अनूठी तुमरी..

पायल बनकर अब हूँ थक गयी
घायल बनकर अब हुं पीस गयी
जन्म जन्म से हुं मैं तेरी कजरी..।

दर्दे दिल का बस तू सच्चा साकी
सर्द जग का क्या हिसाब बाकी
काहे ना सुने तू फिरयाद हमरी...!

रोम रोम बस तोहे ही तो गाये
सोहं सोहं बस मोहे तो भाये
अद्वैत रिश्ते में क्यों आये बदरी..!

प्यास मिलन की कर दो पूरी
कब बतला दूर होगी ये दूरी
बनना मुझे अब तेरी मुरली...!!
प्रियतम प्यारी बनुं अनूठी तुमरी।।

मीरा नहीं, ना हु मैं राधा तेरी
अधूरी हुं, तुझ बिन अँधेरी
भक्ति की भर दो मेरी गगरी..!
प्रियतम प्यारी बनुं अनूठी तुमरी।

- वृषाली सानप काले

सजा (संवादात्मक कथा)

"बोल होमवर्क पूरा क्यों नही किया..?"
"सर नहीं हुवा..?"
"नही हुवा तभी तो खड़ी हो..?"
"जी..जी सर.."
"जी जी... क्या कारण बताओ..?"
"सर नही कर पाई.."
"पर क्यों..?"
"सर कैसे बताऊ..."
"अपनी ज़ुबान से..ज़ुबान है न.."
"..."
" गूंगी है क्या..?"
"सर,.... सच बताऊ...?"
"तो क्या झूठ बताएगी..मेरी अम्मा...?"
"...."
"..बता जल्दी..."
"सर..सर..मेरा बाप दारू पिता है।"
"मुझे लगा ही था, पर पढ़ई तो तुझे करनी है न.."
"जी, पर सर ...
वो घर आकर मां को रोज पिटता है। हमेशा..."
"अच्छा, तो..."
"सर ,परसो भी उसने माँ को खूब पीटा। मेरी माँ पेट से थी सर..."
"....."
"उसने मां की पेट में दो चार लात मारी थी..!"
"....."
"उसका पेट दर्द कर रहा था। मैं दवाई ले आयी थी पर नही रुका दर्द।
..मै उसके 5 घर का काम करने जाती थी महीने से...!"
"क्या...?"
"जी सर..."
"पर अब 4 दिन…

तुम

न जाने क्यों आज रो रही हुं मैं क्या तुम्हें फिर से खो रही हुं मैं...!!
बार बार उसी संघर्ष की तह में हर हार की सहर्ष की गह में क्यों फिर से आजमा रही हुं मैं... क्या तुम्हें फिर से खो रही हुं मैं...!!
क्या चाहना है जिंदगी से न जानु मैं क्या मांगती हुं जिंदगी से न जानु मैं क्यो कश म कश में ढो रही हुं मैं...!! क्या तुम्हें फिर से खो रही हुं मैं...
विरक्त विभक्त सी जी ही रही हुं मैं पर तुम्हारे बिना न जी पा रही हुं मैं क्या हर बार खुद को ही आजमा रही हुं मैं क्या तुम्हें फिर से खो रही हुं मैं...!! 🌲 - वृषाली सानप काले

कुछ भी नही

बिन तुम्हारे कुछ भी नहीं  जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं 
क्या हुवा है कुछ भी नहीं  क्या टूटा है कुछ भी नहीं  क्या रुकेगा कुछ भी नहीं  जिंदगी हमारी कुछ भी नही
क्या बनेगी ये कुछ भी नहीं  क्या सजेगी ये कुछ भी नहीं  क्या वफाई थी कुछ भी नहीं  जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं 
क्यों सिलवटें जिंदगी की बनी रुकावटें जिंदगी की क्या आफरीने भी नहीं  जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं 
क्यों साध ले साधना की क्यों बाँध ले आराधना की शिकायत तो कुछ भी नहीं  जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं ...
ये लकीरों की भी क्या ज़्यादती  तकदीरों की भी क्या ताजगी हमको चाहत तो कुछ भी नहीं  बिन तुम्हारे तो कुछ भी नहीं  कुछ भी नहीं  कुछ भी नहीं 
- वृषाली सानप काले

कैसे कहूँ

भावनाओ के खेल में
हर बाज़ी हमने है हारी
कश म कश के खेल में
कैसे कहुँ  के हुं तुम्हारी...

रिश्ता जो मांगे उम्मीदें
क्या होंगे पूरे वो वादे
चाहत जो चाहे इरादे
क्या वो मिलेंगे काँधे..
कैसे हो पूरी जिम्मेदारी...?
कैसे कहूँ के हुं तुम्हारी

पाक पाकिज तो है ही
क्या दिलाएगा वो माही
साद सादगी का राही
क्या दिलाएगा जिंदगी..
जिंदगी है तुमपे ही वारी
कैसे कहूँ की हुं तुम्हारी..

व्यवहार संसार निसार
कैसे होंगे मिलनसार...
कैसे जुड़ेगा इनका तार
कौन वादा निभावु यार..?
हुं मैं तो मर्यादि देहधारी..
कैसे कहूँ की हुं तुम्हारी

- वृषाली सानप काले

हम आपके है कौन..??

समझ सको तो समझो ये मौन
के साथी हम भी आपके है कौन...??

दीदार देने की उम्मीद के
इजहार होने की चुप्पी भी नम
सनम शब्द सच मे कितने है गौण...!!
के साथी हम भी आपके है कौन..??

मजबूरी के आंचल में भीगे हम
बेबसी के दाग के चुनिंदे हम
सजन गूंज दिल की क्यो है मौन...??
के साथी हम भी आपके है कौन...??

सांसो की रफ्तार भी है कम
समय की कतारो की है कसम
बलम की बाहों में मिटे प्रेम की कौम...!!
के साथी हम भी आपके है कौन...??

समझ सको तो समझ लो ये मौन
के साथी हम भी आपके है कौन...??

- वृषाली सानप काले

क्या कर पाओगे!!

क्या उठा ले जावोगे यहां से क्या छुपा पावोगे हमे जहां से क्या हिफाजत करोगे फिजा से क्या ईमान बचा पावोगे जग से क्या बचावोगे उलझनों से क्या उबारोगे मुश्किलों से क्या मिलावोगे मुक्ति की चाह से क्या शांति दिलावोगे जहां से क्या साँसो को बचावोगे गन्दगी से क्या जिलावोगे हमें पाकीजगी से अब न है कोई गीला जिंदगी से अब न है मिलना जिंदगी से क्या जिम्मेदारी को निभावोगे हर अदा से 🤔 - वृषाली सानप काले

कृष्णा

बनी मैं तेरी मुरली मुरारी प्रीत में तेरी दुनिया हारी कृष्ण कन्हैया तुमपे वारी...
तुझसे ही प्रीत तू ही है मीत जीवन का सफल तू संगीत चारो धर्म को तू ही सवारी.. कृष्ण कन्हैया तुमपे वारी...
नेति नेति इति की सद्बुद्धि सिखाये माया की अवरुद्धि निवाले में दी माखन की क्यारी.. कृष्ण कन्हैया तुमपे वारी...
जीव जगत की सृष्टि माया रूहको तुने रूहसे मिलाया जिस्मानी डोर तोड़ी सारी.. कृष्णकन्हैया तुमपे वारी..!
अब अपना लो तुम ये चेरी सुन लो विरह की ये भेरी भस्म कर दो हदे ये सारी... कृष्ण कन्हैया तुमपे वारी..!
कान्हा न जाने प्रीत न जाने अद्वैत प्रेमको जगत न माने ओ ज्योतिर्मय प्रेम मुरारी कृष्ण कन्हैया तुमपे वारी...!! 🌹 🖋️वृषाली सानप काले

मुकद्दर

जख्म सीकर भी हर पल हंसाता रहा कफ़न बांधकर भी जिलाता रहा
जो हुवे थे गुनाह जिंदगी से हमारे वक्त भी उसकी कीमत चुकाता रहा
आजमाते ही रहे वो रुलाते रहे खामोश बन तमाशे को मिलाता रहा
सब देते रहे तौफे इल्जामों के पर ये पाकिज दिल उल्फ़ते वफ़ा निभाता रहा
हम तो कुर्बान थे नेकी के राह पर सरफरोशी का नशा दीवाना बनाता रहा
पुचकारा, सराहा, झकझोरा जग ने दर्दे दिल तो सभी से दर्द छुपाता रहा
ये खुदा का बन्दा तो फरिश्ता बनके बेडर बन मौत से मिलता ही रहा
अर्थी जनाजा से ना लागे डर ये तो कर्मो से मुकद्दर सजाता रहा 🌱 - वृषाली सानप काले

तमाशा

वेदनाओं से मुझे यू मोहब्बत हुई बेदर्दी जमाने से भी मोहब्बत हुई
होती नही पूरी हर बात मन की जिंदगी को ही खुशी से शिकायत हुई
मिलता नही किनारा डूबती कश्ती को इंसानियत भी यहां बगावत हुई
खुदा के बच्चो की हसीन खुदाई रब की बदनाम वो भीअमानत हुई
खाली हाथ आना जाना है फितरत जिस्मानी इश्क ही अदावत हुई
सरे आम लुटे वफ़ा को वहशी दरिंदे कुछ इस कदर मक्कारी से मोहब्बत हुई...!! 🌹 - वृषाली सानप काले

खुदा

कितनी गवाई तूने जिंदगी फिर भी न जानी वो बन्दगी खुदा खुदाई उसकी सादगी हसीन प्यारी है वो बन्दगी
देखो न ढूंढो उसकी ताजगी दिल से पुकारो है लाजमी अम्बर से परे जहां से न्यारे अलौकिक पाक है वो जिंदगी
साकार नही वो समस्त नही  कटे न फटे वो तो अस्त नही निर्माण स्वरूप वो ध्वस्त नही संवारे आत्मा की आवारगी
ज्ञान गुण प्रेम वो है नीति निराकार है वो है ये निश्चिती भांप न पावोगे उसकी गति अब तो जागो बीतेगी जिंदगी 🙏 - वृषाली सानप काले

जर्रा

वो मुझे क्यो तोड़ता है हमेशा तोड़के फिर मुस्कुराए हमेशा
वक्त को बहलाता है हर बार हम जो पूछे क्यो आजमाए हमेशा..!
नोक झौक से आँखे भरे जो गर  जख्मो पे मरहम भी लगाए हमेशा..!!
कोई रिश्ता उससे नही है मेरा पर फरिश्ते सा लगता है हमेशा...!!
मेरी उम्मीद सपने संभाले सदा क्यो व्यवहार अव्यक्त हमेशा...!!
तुझे खोने के डर से रोये आँखे क्यो तेरा सहारा चाहु हमेशा..!!
क्या चाहते हो बता दो जरा क्यो पहेली बनते हो हमेशा..!!
वो अद्वैत रिश्ता मेरा तुम्हारा तेरे प्रेम का भरा ये जर्रा हमेशा..!!
- वृषाली सानप काले

आओ पवन प्यारे (अनुवादित)

*घाल घाल पिंगा वार्‍या माझ्या परसात* *माहेरी जा सुवासाची कर बरसात*
"सुखी आहे पोर"- सांग आईच्या कानात "आई, भाऊसाठी परि मन खंतावतं !
विसरली का ग भादव्यात वर्स झालं, माहेरीच्या सुखाला ग मन आचवलं.
फिरुन-फिरुन सय येई जीव वेडावतो चंद्रकळेचा ग शेव ओलाचिंब होतो.
काळ्या कपिलेची नंदा खोडकर फार, हुंगहुंगुनिया करी कशी ग बेजार !
परसात पारिजातकाचा सडा पडे, कधी फुलं वेचायला नेशील तू गडे ?
कपिलेच्या दुधावर मऊ दाट साय माया माझ्यावर दाट जशी तुझी, माय... !"
आले भरून डोळे पुन्हा गळा नि दाटला माउलीच्या भेटीसाठी जीव व्याकुळला !
*-कृ. ब. निकुंभ* ************************      आओ पवन प्यारे  ************************ आओ पवन प्यारे झूलो मेरे आँगना प्रेम सुगंध प्यारी मायके में बरसाना..!!
सुख में है बेटी तेरी माई से कहना पर भाई के लिए पड़े है तरसना..!!
भूल गए क्या माई भादो को साल बिता मायके के सुख खातिर मन ये मानेना..!!
फिर फिर याद से दिल होवे दीवाना चन्द्रकला केआँचल का छोर नित गीला..!!
बछिया काली कपिला की बदमाश गाये गाना हूँम हूँम कर छेड़े मेरे गम का तराना..!!
पारिजातक की बहार पड़ती होगी आँगना कब …

जुदाई

अब ना सही जाये  तेरी जुदाई नाही बनो बाबा तुम हरजाई...!! 🌺 सारी परीक्षाये भी अब  है बीती भक्ति की निभाओ अब ये निति करो उद्धार मेरा अब घडी आई. नाही बनो बाबा तुम हरजाई..!! 🌹 जगरित उल्टी ना बने ये पल्टी उड़ आउ तेरे द्वार सुन मनकी मेरी वफ़ा क्यों तुमको नही भाई. नाही बनो बाबा तुम हरजाई 🌻 युग युग से बस तुम ही आये आ तारणहार अब ले जाये कसम तुम्हे जो आँख बहाई..!! नाही बनो बाबा तुम हरजाई..!! 💐 आग बना या धूल बना के ले जा. साज सजा या फूल बना के ले जा पलको ने है दिल मेरी बिछाई.. नाही बनो बाबा तुम हरजाई...!! 🌷 - वृषाली सानप काळे

स्वतंत्रता

खुशहाल रहे तेरी स्वतंत्रता होनहार रहे तेरी स्वतंत्रता.. तेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता..
होठो पे सजी है मेरी स्वतंत्रता साँसों में बंसी है मेरी स्वतंत्रता... आंखों से बहे है मेरी स्वतंत्रता दुहाई ही देती है मेरी स्वतंत्रता...! मेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता..।।
जीवन को सिखाये ये एकता रुदय में जगाये ये पावनता सत्मार्ग दिखाये गाके मन्त्रता सिद्धांत जताये ये स्वतंत्रता..!! मेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता...!!
आओ मिलकर निभाये दृढ़ता मन मन से हम निकाले मूढ़ता विश्व को बतादे इसकी गूढ़ता अब नाही दिलाओ परतंत्रता...!! मेरी स्वतंत्रता मेरी स्वतंत्रता...!! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳💐💐💐🇮🇳🇮🇳🇮🇳
- वृषाली सानप काले

मेरे जीवन का लक्ष्य

नमस्ते मैं एक छोटी सी बच्ची हुं। आखिर मेरा क्या होगा लक्ष्य ..?? सब यही सोचते होंगे...??
     लेकिन ऐसा नहीं छोटी उम्र में ही तो जीवन के धेय्य निश्चित होते है। उन्हें सही तरीके से सवारना तथा तराशना जरूरी होता है।
    मैं भी सोचने लगी कि सचमुच अगर मैं कुछ बनूँगी जीवन मे तो क्या बनूँगी...?? कुछ निश्चित करूँगी तो क्या करूँगी...??
 मैन मेरी आँखों के सामने ऐसे कई लोग देखे है, जो जीवन में कुछ भी बनने के बारे में कभी कोई भी निश्चित दिशा नही लेते, बस चलते चले जाते है। चलना है इसलिए। तो क्या मुझे ऐसा बनना है..??
   मैन ऐसे भी लोग देखे है जीवन में जो जीवन को इसलिए जीना चाहते है, क्योँकि कोई उनपर आश्रित है। जो जीवन में उस पथ को अपनाना ही धेय्य मानते है, जिसके द्वारा, जिस पर चलने से उन्हें पैसो की प्राप्ति हो सके...!! तो क्या मुझे भी ऐसा बनना है...??
   मैंने ऐसे भी लोग देखे है, जो पहले से सोचते है कि किस मार्ग पर इज्जत, पैसा तथा ताकत मिलती है, वही मेरी मंजिल होगी। फिर उस इज्जत, ताकत एवं पैसे का इश्तेमाल वे किसी भी तरीके के कामो के लिए करते है। क्या मैं ये चाहती हु..??
  मैंने ऐसे भी लोग देखे है…