रंग गई

तेरी सारी शिकायते
अब काफूर हो गई..
ऐ री बेवफा जिंदगी
मुझे मोहोब्बत हो गई..।।

मेरी सारी संजीदगी
करने लगी  बन्दगी..
उलझनो सी थी तुम
तुमसे इनायत हो गई...।।

सारे अडिग सिद्धांत
बने तेरे उपादांत...
अमर्याद असम्भव
पर तू मेरी हो गई..।।

नही सोचा तुम संग
जीवन लाएगा रंग..
पर कैसे अब तेरे
ही रंग में रंग गई..।।
~~~~~~~~~~~~
- वृषाली सानप काले

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