समुद्र मंथन : एक तिलस्मी रहस्यमयी खजाना
सृष्टि के आरंभ से ही कुछ ऐसी कथाएँ हैं जो जन-जन के मानस में रची-बसी हैं। हर बच्चा, हर युवा और वृद्ध 'समुद्र मंथन' की घटना से भली-भांति परिचित है—देवताओं और असुरों की खींचतान, मंदर पर्वत की मथानी, वासुकी नाग की नेति बनाकर मंथन करने पर आरंभ में विष निकलना और अंत में अमृत निकलना , और साथ ही चौदह रत्नों का प्रकट होना! परंतु क्या यह केवल एक सर्वज्ञात पौराणिक घटना या देवताओं-दानवों के बीच हुए युद्ध का विवरण मात्र है? या फिर इसके तिलस्मी आवरण के पीछे जीवन, साधना और कैवल्य (मोक्ष) का कोई अत्यंत गहरा रहस्य छिपा हुआ है? जब हम भीड़-चाल और अंधानुकरण ("गडरिया प्रवाह") से हटकर विवेक की दृष्टि से देखते हैं, तो समुद्र मंथन किसी पौराणिक कालखंड की कहानी नहीं, बल्कि हमारे ही अंतर्मन के भीतर छिपा एक तिलस्मी खजाना साबित होता है। इस पूरी यात्रा को अगर हम गहराई से समझें, तो यह और कुछ नहीं बल्कि हमारे अपने भीतर रोज़ चलने वाला अंतर्द्वंद्व है। १. क्षीर सागर और मंदर पर्वत : हमारी चेतना और संकल्प क्षीर सागर: यह हमारी अनंत चेतना और विचारों का सागर है। जिस प्रकार समुद्र अथाह और निरंतर ...