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भगवान, आस्थ और सत्य की खोज : एक मंथन

🌸 भगवान, आस्था और सत्य की खोज मनुष्य जब से सोचने और प्रश्न करने लगा है, तब से उसके सामने कुछ प्रश्न निरंतर खड़े हैं— मैं कौन हूँ? यह संसार किसने बनाया? भगवान वास्तव में हैं या नहीं? राम, कृष्ण, शिव, ब्रह्मा और देवी-देवताओं का वास्तविक स्वरूप क्या है? और यदि विज्ञान हर बात का उत्तर खोज सकता है, तो फिर भगवान की आवश्यकता कहाँ है? ये प्रश्न केवल धर्म के नहीं हैं। इनमें दर्शन भी है, विज्ञान भी है और मनुष्य के भीतर छिपी सत्य को जानने की अनंत जिज्ञासा भी। शायद इन प्रश्नों का सबसे सुंदर उत्तर किसी एक विचार को अंतिम सत्य मान लेने में नहीं, बल्कि अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने में है। 👉 भगवान कौन हैं? भारत की धार्मिक परंपरा में भगवान के अनेक नाम और स्वरूप हैं। कोई श्रीराम की पूजा करता है।  कोई श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानता है।  कोई भगवान शिव की आराधना करता है।  कोई माता दुर्गा, लक्ष्मी या सरस्वती की उपासना करता है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है कि भगवान अनेक हैं। लेकिन भारतीय दर्शन की अनेक धाराएँ एक गहरी बात कहती हैं— नाम अनेक हो सकते हैं, रूप अनेक हो सकते हैं, लेकिन परम सत्य...
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