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सच्ची मुक्ति

कभी-कभी जीवन में ऐसे लोग मिलते हैं जिनके लिए हम अपने हृदय में एक विशेष स्थान बना लेते हैं। उनके सुख-दुःख, उनकी बातें, उनकी उपस्थिति—सब हमारे लिए महत्व रखने लगते हैं। हम बिना किसी गणना और बिना किसी शर्त के अपना समय, अपना स्नेह और अपनी शुभेच्छाएँ उन्हें अर्पित कर देते हैं। किन्तु हर संबंध एक-सा नहीं होता। कुछ लोग हमारे भावों को समझते हैं, तो कुछ उन्हें सहज उपलब्ध मान लेते हैं। वे कभी निकट आते हैं, कभी दूर चले जाते हैं, फिर लौटते हैं और फिर वही दूरी बना लेते हैं। उनके इस व्यवहार से मन थकने लगता है। तब प्रश्न उठता है—क्या हमें उनसे शिकायत करनी चाहिए, या स्वयं को समझना चाहिए? समय के साथ समझ में आता है कि मनुष्य का स्वभाव उसके अपने संस्कारों, अनुभवों और दृष्टिकोण से निर्मित होता है। हम किसी के व्यवहार को बदलने का प्रयास कर सकते हैं, पर उसे नियंत्रित नहीं कर सकते। जो हमारे वश में है, वह केवल हमारा दृष्टिकोण और हमारी प्रतिक्रिया है। जब अपेक्षाएँ बढ़ती हैं, तब उपेक्षा अधिक चुभती है। और जब हम अपने सुख का आधार दूसरों की प्रतिक्रिया को बना लेते हैं, तब मन बार-बार आहत होता है। परंतु जिस दिन हम ...

श्याम का आना (ग़ज़ल)

¶ विधा - ग़ज़ल/गीतिका ¶ काफिया - आना ¶ रदीफ़ - बन गया ************************************** (श्याम को समर्पित भाव) तेरे आने से सारा आलम, श्याम सुहाना बन गया, तेरी सांवली सूरत देख, मेरा दिल दीवाना बन गया तेरा मंद-मंद मुस्कुराना मेरा दिल हुआ चोरी बस, तेरी जुबां से निकला हर लफ्ज़ इक तराना बन गया तेरी नज़र का मिलाना, घायल हुआ मेरा दिल, तेरा ये अंदाज कान्हा मेरे नयन छलकाना बन गया तेरा साँसें चलाना मेरे चित्त को महाकाये जाए है, तेरा नाम गुनगुनाना श्याम मेरी धड़कन का फ़साना बन गया तेरी बाँसुरी सुनाना मेरे सोए भाग जाग जाए श्याम, तेरी यादों का झिलमिलाना मुझे रुलाना बन गया ********************************* - कौशल्या वाघेला