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Showing posts from August, 2018

चरितार्थ

कितनी हैरत की बात है कि जिंदगी भर इंसान जीते तो जाता है,परन्तु ऐसी कई बातें कई शब्द होते है ,जिन्हें वह आजीवन समझ नही पाता...!!शायद इसी का नाम अज्ञान है..!! व्यक्ति खुद को अज्ञान शब्द से जोड़ने से भी कतराता है।वह इस अज्ञान शब्द से भी अज्ञात है,क्योँकि अज्ञान है...!अज्ञान याने जिसका ज्ञान नही है।अज्ञात याने अपरिचित,अजनबी याने जिसे जानते नही है..!!    तो ये मनुष्य की प्रवृत्ति है कि उसे ज्ञात नही जिसका उसे ज्ञान नही है वह उसे ज्ञात कर ले,वह उससे सही व योग्य ज्ञान से परिचित हो...!!    ऐसा ही एक गहन शब्द है ,चरीतार्थ...!!    जिस अलौकिक शब्द को भी हम लोगो के अज्ञान ने अत्यंत सामान्य बना रखा है।हम इस शब्द को जोड़ते है उदरनिर्वाह करना 'इस अर्थ से..!!उदर निर्वाह याने पेट भरना..!परन्तु चरितार्थ शब्द का अर्थ यह नही है...!!   वास्तव में चरितार्थ यह शब्द एक आध्यात्मिक शब्द है ,तो जाहिर है इसका अर्थ भी आध्यात्मिक ही होगा।   अपने चारु चरित से जग में प्राप्त करो फल चारो।ये चारों फल इस चरितार्थ पर निर्भर होते है। चरितार्थ यह एक साधना की विधा की तमाम सीढ़ियों...