"बोल होमवर्क पूरा क्यों नही किया..?" "सर नहीं हुवा..?" "नही हुवा तभी तो खड़ी हो..?" "जी..जी सर.." "जी जी... क्या कारण बताओ..?" "सर नही कर पाई.." "पर क्यों..?" "सर कैसे बताऊ..." "अपनी ज़ुबान से..ज़ुबान है न.." "..." " गूंगी है क्या..?" "सर,.... सच बताऊ...?" "तो क्या झूठ बताएगी..मेरी अम्मा...?" "...." "..बता जल्दी..." "सर..सर..मेरा बाप दारू पिता है।" "मुझे लगा ही था, पर पढ़ई तो तुझे करनी है न.." "जी, पर सर ... वो घर आकर मां को रोज पिटता है। हमेशा..." "अच्छा, तो..." "सर ,परसो भी उसने माँ को खूब पीटा। मेरी माँ पेट से थी सर..." "....." "उसने मां की पेट में दो चार लात मारी थी..!" "....." "उसका पेट दर्द कर रहा था। मैं दवाई ले आयी थी पर नही रुका दर्द। ..मै उसके 5 घर का काम करने जाती थी महीने से...!" "क्या...?" "जी सर....
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”