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कोलाहल

मेरे खुदा, जबसे तुमसे मुलाकाते हुई क्या कहूँ की जिंदगी कितनी खूबसूरत हुई..!!
तुम्हारी हर एक बात, मुझे अनायास सिखला गई... नही कोई होता यहां अपना अरी, हर शख्शियत है पराई...!!
अब तक जो न उलझी थी वो हर सूक्ष्म सी भी लड़ी... वो हर प्रश्न बौछार सुलझी..थी जब बस रही तेरे संग मैं खड़ी...!!
दर्द पीड़ा यातना संघर्ष कथा मन के कोलाहलो की कथा.. दर्द की अभिव्यक्ति जब होती तब नई कविता बनती जाती...!!
ऐ खुदा ,अब हटे कोलाहल सारे तूफान भी तो लगते है सितारे... गुम हु प्यार में ही तुम्हारे... बन गए हम बस तुम्हारे...!! बन गए हम बस तुम्हारे...!!
- वृषाली सानप काले

माँ हिंदी का पत्र

प्रति, मेरे समस्त  हिंदी प्रेमी बच्चे.. एवं भारतवासी...!!       मेरे प्रिय बच्चो,      हजारों लाखों प्रेमयुक्त आशीष ...!!जुग जुग जी लो..!!लंबे समय से यह पत्र तुम्हे लिखना चाहती थी,परन्तु शायद वह वक्त अभीतक नही आया था।आज वक्त की मांग अनुसार एवं परमात्मा के आदेश अनुसार यह बात समस्त इंसानों तक पहुंचाना मेरा कर्तव्य बन गया है।बच्चो मैंने पिछले 70-73 सालों से देखा है कि,तुम लोगो मे लगातार मुझे लेकर एक गुमनाम सी लड़ाई चल रही है।मैन देखा है कि ,मैं व मेरी बहनों के अस्तित्व को लेकर तुम इतने विवादात्मक स्थिति में खड़े हो जाते हो कि कभी कभी एक दूसरे की जान के दुश्मन भी बन जाते हो।मैन देखा है कि,इस विवाद में सभी विकारों को बढ़ावा भी तुम देते हो।कभी घृणा,जलसी,ईर्ष्या,दुश्मनी,निंदा,परित्याग,हिंसा तक करने पर आ जाते हो। बच्चो,पर तुम में से कई लोग यही नही जानते के आखिर मैं कौन हूं एवं कब से हूँ...! बच्चो मेरा अस्तित्व नाही स्वतंत्रता के वक्त से आया है ना ही उसके बाद मैं जन्मी हूँ..!!**हा, यह बात है कि जब मेरे व परमात्मा के अति प्रिय बच्चे इस सृष्टि के रंगमंच पर परमात्मा के आदेश अनुसार अपनी भूमिका निभान…