कोलाहल

मेरे खुदा,
जबसे तुमसे मुलाकाते हुई
क्या कहूँ की
जिंदगी कितनी खूबसूरत हुई..!!

तुम्हारी हर एक बात,
मुझे अनायास सिखला गई...
नही कोई होता यहां अपना
अरी, हर शख्शियत है पराई...!!

अब तक जो न उलझी थी
वो हर सूक्ष्म सी भी लड़ी...
वो हर प्रश्न बौछार सुलझी..थी
जब बस रही तेरे संग मैं खड़ी...!!

दर्द पीड़ा यातना संघर्ष कथा
मन के कोलाहलो की कथा..
दर्द की अभिव्यक्ति जब होती
तब नई कविता बनती जाती...!!

ऐ खुदा ,अब हटे कोलाहल सारे
तूफान भी तो लगते है सितारे...
गुम हु प्यार में ही तुम्हारे...
बन गए हम बस तुम्हारे...!!
बन गए हम बस तुम्हारे...!!

- वृषाली सानप काले

Comments

Popular posts from this blog

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा की विशेषताएं

संस्कृत भाषा के शब्द भंडार से सम्बंधित बातें

इम्तिहान