भूमिका समय के साथ मनुष्य का ज्ञान, विज्ञान और तकनीक निरंतर विकसित होते रहे हैं। प्रत्येक युग अपने साथ नई संभावनाएँ लेकर आया है। वर्तमान युग में ऐसी ही एक क्रांतिकारी उपलब्धि है— कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI)। आज शिक्षा से लेकर चिकित्सा, कृषि से लेकर उद्योग, अनुसंधान से लेकर दैनिक जीवन तक AI का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। अनेक कार्य जो कभी घंटों या दिनों में पूरे होते थे, वे अब कुछ ही क्षणों में संपन्न होने लगे हैं। ऐसी स्थिति में एक प्रश्न स्वाभाविक रूप से सामने आता है—क्या AI मानवता के लिए वरदान है या अभिशाप? इस प्रश्न का उत्तर केवल तकनीक में नहीं, बल्कि उसका उपयोग करने वाले मनुष्य के विवेक में निहित है। AI की पहचान AI ऐसी तकनीक है, जिसे मनुष्य ने इस प्रकार विकसित किया है कि वह उपलब्ध जानकारी के आधार पर सीख सके, विश्लेषण कर सके, सुझाव दे सके और अनेक कार्यों को शीघ्रता से पूरा कर सके। यह मनुष्य की बुद्धि का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उसके कार्यों में सहयोग देने के उद्देश्य से विकसित की गई है। AI स्वयं कोई स्वतंत्र चेतना नहीं रखती। वह उतना ही कार्य करती...
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”