🌷 हिंदी भाषा-शिक्षण में सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियाँ Hindi Language Teaching Methodology भाषा केवल पुस्तक पढ़कर या व्याकरण के नियम याद करके नहीं सीखी जाती। भाषा का वास्तविक विकास उसके प्रयोग और अभिव्यक्ति से होता है। इसलिए हिंदी भाषा-शिक्षण में ऐसी गतिविधियों का विशेष महत्व है, जिनमें विद्यार्थी स्वयं हिंदी का प्रयोग करते हुए सीखता है। 1. सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों का अर्थ पाठ्यक्रम में निर्धारित विषयों के साथ विद्यार्थियों के ज्ञान, भाषा-कौशल, रचनात्मकता और व्यक्तित्व के विकास के लिए आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों को सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियाँ कहा जाता है। हिंदी भाषा के संदर्भ में इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा के वास्तविक प्रयोग के अवसर प्रदान करना है। 2. हिंदी भाषा-शिक्षण में महत्व सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों से— विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ती है। सुनने और बोलने का अभ्यास होता है। पठन एवं लेखन-कौशल विकसित होते हैं। शब्द-भंडार में वृद्धि होती है। उच्चारण और भाषा-प्रयोग में सुधार होता है। रचनात्मकता एवं कल्पनाशक्ति का विकास होता ...
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”