🌷 1. अव्ययीभाव समास विशेषता: इसमें पहला पद प्रधान होता है और पहला पद प्रायः अव्यय होता है। पूरा समस्त पद भी प्रायः अव्यय की तरह प्रयुक्त होता है। पहचान: प्रति, यथा, आ, भर आदि जैसे अव्यय मिलें। उदाहरण: प्रतिदिन = प्रत्येक दिन यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार आजीवन = जीवन भर 🌷 2. तत्पुरुष समास विशेषता: इसमें दूसरा पद प्रधान होता है। विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच कोई कारक-चिह्न छिपा होता है। पहचान के लिए: का, के, की, को, से, के लिए, में, पर आदि। उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र → षष्ठी तत्पुरुष गुरुदक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा → चतुर्थी तत्पुरुष हस्तलिखित = हाथ से लिखित → तृतीया तत्पुरुष वनवास = वन में वास → सप्तमी तत्पुरुष भयमुक्त = भय से मुक्त → पंचमी तत्पुरुष 👉 इसलिए का/के/की, को, से, के लिए, में, पर दिखे तो पहले तत्पुरुष की संभावना देखिए। 🌷 3. कर्मधारय समास विशेषता: इसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है। दोनों मिलकर उसी वस्तु/व्यक्ति का बोध कराते हैं। पहचान: विग्रह में अक्सर “जो/है जो” या सीधा विशेषण + संज...
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”