श्रद्धा से किया गया हर जप सबसे पहले साधक के अंतर्मन को स्पर्श करता है। फिर वही भाव मौन प्रार्थना बनकर ईश्वर के श्रीचरणों में पहुँच जाता है। और वहाँ से लौटता है— शांति, धैर्य, विश्वास और एक नई जीवन-ज्योति बनकर। — कौशल्या वाघेला ‘कुंदन’
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”