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Showing posts from 2018

અષાઢી મેઘ

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અષાઢી મેઘ - Kaushalya ભીની માટી ની સોડમ આવે, મને બચપન ની યાદ સાંભરી, આજ આ ખુશનુમા મૌસમ માં મન મૂકી ઝૂમવા ચાહે, મન પ્રફુલ્લિત છે આજ, ભીંજાય જાવ આજ મન મૂકી ઝરમર મેહ વરસે આજ, માટી ની મહેક પ્રસરી રહી અષાઢની રઢિયાળી રાત માં, મન પણ તેના રંગ માં રંગાવા ચાહે.... ****

बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

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बरखा : मौसम-ऐ-शरारत - Kaushalya करवट बदली मौसम ने, और अंगडाई ली हवाओं ने लहरायी चुनरियाँ बदलो ने, आसमान में फैलाया आँचल धरती ने सज़ा रूप नया चारों तरफ फैली हरियाली देखो वो.... उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे शरारत तो देखिए मौसम की, झूमता हुआ सावन आया याद ले आई आपकी मन चाहे कि.... ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ ले आए आपको हमारे पास और मेघ बन बरसे आप का स्नेह बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ, कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की। मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ आया सावन चित्त चुराने प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन आयी ऋतु रंग सजाने की, प्रकृति से मन तक पहुँचने की। ***

અવસર (अवसर)

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અવસર - Kaushalya અવસર મડ્યો આજ ગુમવવો નથી, બે મીઠી વાત કરી લવ તમારી સાથ. આ અમૂલ્ય ક્ષણ હવે વેડફવી નથી, યાદગાર બનવી લવ મારી આ સ્મૃતિ. અવસર આવો મડે ના ફરી, આવ કરિશ્મા સર્જાતા હોય છે કદી. ******** अवसर - Kaushalya अवसर मिला है आज गुमाना नहीं, दो मीठी बात कर लू आपके साथ। ये अमूल्य क्षण अब गवाना नहीं है , यादगार बना लू अपनी ये स्मृति। अवसर ऐसा मिले न फ़िर से, ऐसे करिश्मा सृजन होता है कभी। *

आपका आना

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आपका आना - Kaushalya सुरमयी शाम लाती है रात का पैगाम , होती  है हर रात की सुबह नयी, भोर से होती है हर दिन की शुरुआतनयी, वैसे  ही.... आप आए सुबह की भोर बनके, और मेरे जीवन की हुयी शुरुआत नयी। (*_*)

कविता की रचना

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कविता की रचना - Kaushalya पुराना ही ये स्वर है, अंकुर फूटे मन् में, इसलिए लगता नया है। वही है शब्द भंडार, इर्द-गिर्द बिखरे शब्द, पिरोये एक माला में, बन गई नयी सचना, उसका नाम रखा कविता। ***

सवेरा

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सवेरा - Kaushalya कितना हसीन है मौसम, परिंदों के कलरव से उठा सवेरा, रंग-बे-रंगी आसमान से आच्छादित सृष्टि सारी, सूर्योदय की किरणों ने बिखेर दिया अपना साम्राज्य, शबनम ने लहरायी अपनी भीगी चुनरियाँ, मन्द-मन्द समीर के झोंके आ रहे, मयूर की आवाज़ से गूंज उठा सवेरा, फूलों ने मुस्कुराकर अपनी खुश्बू बिखेर दी, मन्दिर की घंटी का मधुर स्वर है दिशाओं में, वातावरण की हलकी शान्ति ने चित्त चुराया, खुशनुमा नज़ारा देखते ही मन् प्रफुल्लित हो उठा। ^_^

कश्मकश है क्या लिखू (For Blessing)

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कश्मकश है क्या लिखू - Kaushalya लिखू तो मैं क्या लिखू , तुम्हारे नाम...... ये खुला आश्मान लिखू , या तारो से झग-मगाती हुई रात लिखू.... फूलो की महक लिखू , या हवाओं की रवानी लिखू.... तुम्ही कहो अब मैं क्या लिखू.... सोचा है की,.... सूरज की पहेली किरण का सलाम लिखू, देखो तुम्हारी राह में,..... इन्तज़ार करते हुए पहाडों की मृदंग नाद लिखू, किल-किलाहत करती हई नदियों की मुस्कान लिखू, या समन्दर की गहेरायी लिखू, मौसम में तुम्हारे आने की खुशबु का पयाम लिखू, या तितलियो का मेघ-धनुषी रंग लिखू.... उषा के फैले आशमान में, रंग-बे-रंगी रंगों की सौगात लिखू, या चाँद की रोशनी से बनी हुयी आभा लिखू.... देखो ना,.... आदित्य की कुंदन जैसी किरण, जैसे सृष्टि में नवचेतना भर देती है, वैसे ही,...... आज का ये दिन जीवन में नव-पल्लवित सवेरा लाये.... ~*~*~*~*~*~

ईश्वर का अस्तित्व

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[1] ईश्वर का अस्तित्व - Kaushalya जहाँ सवाल उठता है की.... ईश्वर की सत्ता की अस्तित्व है भी या नहीं.... वहां अन्दर से एक आवाज़ आती है.... की पता नहीं. नजाने लोग क्या सोचते है, हम क्या सोचते है फिर भी.... हम उसकी मौजूदगी को नकारते नहीं.... क्योकि वो अपनी अनुभूति करवा कर , हमारे एहसास में जिन्दा हो जाता है. पता नहीं....दुनिया किसके नेतृत्व पर चलती है मालूम नहीं कोन है इसका कर्ता, कोन संभालता है इसके शासन की बागडोर को.... वो अपनी अनुभूति की प्रतीति क्यों करवाता है. जब की हमने उसे देखा नहीं...सुना नहीं... फिर भी हम उसकी हाजरी को नकारते क्यों नहीं... वरण सहर्ष स्वीकार करते है, और उस पर ही सब छोड़ देते है... क्यों.... आखिर क्यों.... * ______________________________________________________ [2] ईश्वर की पहचान - Kaushalya ईश्वर शायद इस प्रकृति में बसा हुआ है.... हमारी अनुभूतियों में है... नदियों की लहेरो में है.... गाते हुए पंछियो में है.... धरती की मिट्टी में है.... फोलों की खुशबू में है... चाँद की रोशनी में है... तारों की टीम-टीम में है... पेड़ - पौधों...

बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा

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बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा - Kaushalya बदलाव कहाँ से आया.... कैसे आया....पता नहीं.... पर जैसा भी है....अच्छा है. दुनिया बदली बदली सी लगती है, खुशियाँ चारो ओर दिखती है. ये बदलाव....आप भी देख रहे है हम भी महसूस कर रहे है ये बदलाव अजीब चमक सी है.... दिशाओ में ...फिज़ाओ में.... बदल रहा है सब कुछ. बदल रहा है फूलों का रंग सब हेरान है , ये जो महसूस हो रहा है सोचते है...ये कैसे हुआ, कब हुआ.....ये बदलाव.... लगता है ये ....सितारे ज़मीन पर हो, और चारो ओर फैला उजाला चाँद ने बिखेर दी अपनी चांदनी आप भी बताईये क्या महसूस हुआ ये बदलाव.... ये ज़मीं को ...नजाने क्या हो गया, या हमारी नजर का धोका है ये बदलाव.... *_*

क्या पाओगे

छल्ली करके दिल को मेरे, हाय रे क्या पाओगे.... *** मेरे आंसूओं में भीगो कर दामन अपना, जाने क्या ले जाओगे... *** खिन्न हुआ आज मन बहुत, मेरे हालत से क्या पाओगे.... *** दिल घायल पंछी सा तड़पता है, झुलसता छोड़ क्या पाओगे... *** जन्नत की तो ना थी ख्वाहिश मुझे, बेमौत दे कर क्या पाओगे... *** कुचल कर अरमानों की नगरी, बेकरार कर क्या पाओगे.... *** - अनामिका 

उठा ली है शमशीर

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उठा ली है शमशीर -  Kaushalya आँटी घूटी जीवन के रास्तो की, जो मझिलों में बाधा डाले  आ जाती है बिन बुलाई, ध्येय से अपने विचलित करने, ऐसी आनेवाली संभावनाओं को अब परास्त करने हेतु भर ली है गहरी साँस  और उठा ली शमशीर   ** शब्दार्थ : आँटी-घूटी =  विपत्तियाँ, मुश्किल स्थिति, उलझने बाधा = रूकावट विचलित करना = गुमराह करना  परास्त = असफल  करना  शमशीर = तलवार 

नयी सोच ... नयी कहानी

" नयी सोच ... नयी कहानी " - Kailash Vaghela              हम जब अपने आस पास होने वाली घटनाओ को देखते है तो हम उसे समजने के लिए सोचना शुरू करते है  ,  की ये क्यों हुआ  ?  कैसे हुआ  ?  किसने किया  ?  ये सब सोचने लगते है .... इसके पीछे क्या कारण है ?  क्या हो सकता है  ?  ये सब हम सोचते है और सोचते सोचते हम इसके नतीजे तक पहुचने की कोशिश करते है और उसका समाधान क्या हो सकता है ये बात भी हम सोच लेते है .... ये ही तो ... यही हमारी कहानी बन जाती है .. इसे ही कहते है क्या सोचा और क्या किया जिसको जोड़ते-जोड़ते हम एक कहानी ही बना दिए । " नयी द्रष्टि... नयी सोच... नए तरीके और नयी कहानी ।"

रहे पास के दूर

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नजदीकियों से तो दूरियाँ भली, पास रहकर प्रित महसूस नहीं होती, दूर रहकर प्रेम नव पल्लवित होता। पास रहकर भी दूरियाँ सी लगती, दूर से भी नजदीकियों की अनुभूति। पास से फैले नफ़रत की ज्वाला, दूर से उर में अमिरस धारा। पास होते तो फरियाद सी रहती, दूर होने से विरह की तड़पन। पास होते तो दूर जाने को कहते, दूर होते तब पास रहने की झंखना। पास होते तो पाषाण ह्रदय, दूर से कोमलपुष्प ह्रदय। एक क्षण को प्रेम उमड़ता, दूसरे ही क्षण स्वार्थ छलकता । सखी, समझ नहीं आता क्या कहे इसे, पारदर्शी है या छल है कोई। मुखौटा है या सच्चाई, अंतर करना है मुश्किल। मन यह दोहरे बर्ताव से असंजस में है, नजदीकियां अच्छी, कि दूरियाँ भली। ________ - अनामिका 

कविता नहीं है ये

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कविता   नहीं   ये   मेरे   दिल   का   है   दर्द  , प्रत्याघात   मिले   उसका   है   प्रतिबिम्ब , कविता   नहीं   है   ये गूंज   है   मेरी   उन   अनुभूतियों   की , मन   में   व्याप्त   उस   घुटन   की   आह   है , कविता   नहीं   है   ये सपना   जो   टूटा   था   उसकी   आवाज़   है , मैंने   जो   महसूस   किया   था   उसके   सूर   है , कविता   नहीं   है   ये अपना   जिसे   माना   था   वहीं   थी   चुभन , पराया   समझ   कर   दिए   थे   जख्म   गहरे , कविता   नहीं   है   ये दिल   दुखाया   था   दिल्लगी   करके , बिखेर   दिया   था   मेरी   हसरतों   को , कविता   नहीं   है   ये आवाज़   नहीं   सुना...

बंजारा मन

शिकायत है कि ध्यान भटकता है हमारा, कोई बताए उनको कि भटकन ही जीवन 💎 जीवन का सार निचोड़ कर देखा तो पाया, कभी यहाँ तो कभी वहाँ भटकते फिरे हम 💎 कभी दिल ने कहा, कभी दिमाग ने कहा, चल यहाँ मेरे संग, यही तो तेरी मंज़िल है 💎 हकीक़त के आईने ने कहा मैं तो तेरे पास, मुझे ढूंढने क्यों भटके इधर उधर लौट आ 💎 तेरा हेतु तो सिर्फ़ मुझे है पाना जाना कहाँ,  मैं तेरे अंदर हूँ चीर काल से जरा झांख खुद में  💎 - अनामिका 

स्पष्टीकरण

रिश्तो में गाँठ पड़ने से कई बार नाराजगी पैदा होती है। फिर कोशिशें शुरू होती है। अंदाजा लगाया जाता है।क्योंं..?, कैसे..?, कब..?, काहे..?, किस लिए..?, क्या वजह..? आदि कई बातें आ जाती है। फिर सफाई दी जाती है। कभी विवाद छिड़कता है। कभी स्पस्टीकरण भी जगह लेता है। स्पस्टीकरण...क्योंं देना पड़ता है..? भरोसा कम पड़ता है इसलिए..?? लेकिन वो तो रिश्ता है ना..?? रिश्ते में अनबन क्योंं..? सफाई क्योंं..?? हम कभी ईश्वर को सफाई देते है क्या..? उसके साथ तो सबसे बड़ा रिश्ता होता है। क्योँकि उसे अपने बच्चो पर एवं हमे उस पर उसकी शक्ति व ताकत्वपर पूर्ण भरोसा होता है। जहां भरोसा होता है वहां सफाई की जरूरत नही होती। जहां भरोसा होता है वहां शिकायत पैदा ही नहींं होती। जहां भरोसा होता है वहां बिन कहे कई सारी बाते अपने आप ज्ञात हो जाती है। क्योँकि वो रिश्ता दिल से जुड़ा हुवा होता है। व्यक्ति को व्यक्ति जैसा है वैसा ही स्वीकारा जाता है। उसके गुण एवं अवगुणों के साथ। व्यक्ति के स्वीकार के बाद, उसके अस्तित्व के स्वीकार के बाद जब उसे प्रेम दिया जाता है, तब शिकायत काहे की..!!अनबन काहे की..!! अविश्वास काहे का..!! ...

रिश्ता नहीं

कोई गिला नहीं, कोई शिकायत नहीं, कैसे कह दे तुम हक़ीक़त नहीं। क्यों रोके तुम्हें, क्यों टोकें तुम्हें, जब तुमसे हमें मोहब्बत ही नहीं। क्यों कहे तुमसे की आना-जाना कभी, जब तुमसे हमारा कोई रिश्ता नहीं। क्यों गोते लगाए वो उम्मीद के दरिया में, जिसका कहीं कोई साहिल ही नहीं। ठहर जाओ थोड़ा सा तुम्हें क्यों कहे, जब तुम्हारे लिए हम कुछ भी नहीं। - 'अनामिका' 

निराकारी लौ

 वे  टाली पे टाली  बजा रहे थे, खुद ही खुद की लाल किये जा रहे थे..!! कितनी खूबसूरती से उसे रास्ते से हटा दिया... सोच सोच हसे जा रहे थे...!! ..  कितने नादान है वे... हम भी सोच रहे थे..!! जब हम कभी भी  किसी के राहों में खड़े ही नही थे..!! जब हम किसी को वैरी मानते ही न थे..!! किसी के न आगे जाना था न किसी के हम पीछै थे..!! हमे कोई क्या हटाये... हम तो अमिट बने थे...!! सबको समाने वाले, सबको जिलाने वाले हम एक निराकार लौ थे... रास्ते से हटते नही रास्ते को भी हटाते नही.. हम तो खुद रास्ते बनाते है...!! - वृषाली सानप काले

Treasure of Heart

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Treasure Of Heart - Kaushalya ''Always Keep smiling like these flowers As the colors of these flowers, Fill deep color in your life ... So many obstacle will comes in your ways ... But you keep smiling like these flowers .... Being in the thorns do not leave flowers smile you remain spread like this fragrances of the flower All their flavor, the mind is happy .... Even if the person, or God, or any mere creature, The fragrance of these flowers, like all of the soul is satisfied, Same as like your "smile".... Flowers are delicate and soft, so you Keep your heart's feelings the soft .... So that whoever you met That "you" to be ...." *

मन का खज़ाना

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मन का खज़ाना - Kaushalya 'इन फूलो की तरह मुस्कुराते रहना हर दम.... इन फूलो के रंग जैसा, रंग भरना अपनी जिंदगी में गहरा... काँटे तो अनेक आयेंगे राहों में, पर आप मुस्कुराते रहना....इन फूलो की तरह.... फूल काँटों में रहकर भी मुस्कुराना नहीं छोड़ते, आप इन फूलो की खुश्बू की तरह महकते रहना.... जो सब को अपनी परिमल से, प्रसन्न चित्त करता है ... चाहे वो इन्सान हो,या परमेश्वर, या कोई भी जीव मात्र, ये फूलो की महेक, जैसे सब को आत्मा-तृप्त करती है, वैसी ही आपकी "मुस्कुराहट" हो.... फूल जैसे नाजुक और कोमल होते है, वैसे ही आप अपने ह्रदय की भावनाओ को "कोमल" रखना... ताकि जो कोई भी आप से मिले वो "आपका" हो जाये....' *

अनुरोध (My Insistence For You)

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अनुरोध (My Insistence For You) - Kaushalya तुम  अपना जीवन शुद्ध जीना   , तुम्हारी राह में जो कोई भी आए, और मदद का हाथ फैलाये, तो उसकी मदद करना ऐ दोस्त, चाहे बस यही एक वादा तुमसे, दे दो या ठुकरा दो हमारी गुजारिस को, शिकवा नही करेंगे कोई तुमसे, ये जीवन है कुंदन जैसा , गवाना मत्त उसे,  क्योंकि.... कल ये मौका फ़िर मिले न मिले। ~*~

Student Life Is The Golden Period Of Life

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Student Life Is The Golden Period Of Life ( विध्यार्थी अपने आप ही अपने भविष्या का निर्माण करे ) विध्यार्थी  जीवन , जीवन का सुवर्णकाल है Student Life Is The Golden Period Of Life. कुच्छ सीखने को , कुच्छ बनने का निरंतर प्रयास इस समय मे ही होता है एक विध्यार्थी के क्या लक्षण होते है , यह नीचे के श्लोक मे दिए गये है ------ "  काकचेष्टा बकध्यानम श्वाननिंद्रा तथैव च । अल्पाहारी  गृहत्यागी विध्यार्थी पन्चलक्षम ॥  " [1] काक (कौआ) चेष्टा :-  कौआ दूर आशमान मे स्वच्छंदता से उड़ाता रहता हो फिर भी उसकी तीव्र द्रष्टि द्वारा ज़मीन पर पड़ी हुई कोई खाध्यपदार्थ को देख कर चपलतापूर्वक वहाँ पहुँच जाता है तथा अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। एसे ही विध्यार्थी भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए तीव्र जिज्ञासा रखे तथा अपना लक्ष्य को प्राप्त करता जाय । [2] बकध्यानम :-  बगुला (Heron) तालाब या नदी किनारे एक पैर (Leg) पर खड़ा रहकर ध्यान मग्न रहता है। मछली देखते तुरंत ही उसे झपट कर अपना आहार बनता है , फिर दुबारा ध्यानस्थ मुद्रा मे हो जाता है। विध्यार्थी भी विद्या अध्ययन...

पॉवर ऑफ वायब्रेशन्स

मेरे  साथियों हो सकता है मेरी बात आपको विचित्र भी लगे तथापि यह सत्य की ताकत है। मेरी स्वयं की रोजाना की अनुभूति है..!! जी हाँ...!! वायब्रेशन...!! वायब्रेशन... में बेहद की ताकत होती है, है ही...!! क्या है जीवन तथा क्या है मनुष्य की जिंदगी...?? केवल वायब्रेशन का ही तो खेल है। वायब्रेशन ही तो दुवा भी देते है..., बद दुवा भी देते है.. जलसी भी देते है.. अपयश भी देते है.. यश भी..! ताकत भी देते है.. कमजोरी भी..!! बीमारी भी देते है.. ठीक भी करते है...! जिंदगी भी देते है.. मौत भी...!! जी,बिल्कुल कटु सत्य...!! जिससे सारी दुनिया अनभिज्ञ है। दुनिया केवल देह व देह की बाते जानती है। देह से परे नहींं। परन्तु सारा जीवन का खेल तो देह से परे दुनिया के असर से ही प्रभावित है..!! मनयुष्य के मन के विचार उसकी पंचेन्द्रियों द्वारा सदैव बाहर अर्थात देह से बाहर निकलते ही रहते है। वो फिर निकलकर जिसके संपर्क में आते है उनके साथ निकल जाते है।     विचार शक्ति ही तो आत्मा की प्रमुख शक्ति होती है। जो संकल्प, संस्कार, कर्म व बुद्धि की परिचायक होती है..!! जो पूर्व जन्म कर्म व संस्कार से सदैव प्रभ...

अध्यात्म क्या है? (भाग - 14) पवित्रता - २

पवित्रता वास्तव में एक कड़वी व गहन तथा अनमोल कुंजी है। जो ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्राप्त हुई है। मनुष्य के सुख का प्रवेशद्वार भी पवित्रता ही है। इस सांसारिक जीवन के संसार में सबसे श्रेष्ठ और उच्चतम सुख अगर है, तो वह है पवित्रता का...!! पवित्रता की स्थिति का अभ्यास व अनुभव सतना सहज साध्य व सहज प्राप्त भी नहींं होता। जिस  अनुभव की प्राप्ति ही सबसे श्रेष्ठ और शक्तिशाली  स्थिति  है। पवित्रता शब्द जितना सहज है उतनी सहज उसकी स्वीकृति नहींं होती। क्योँकि काया, वाचा व मन से किसी का भी दुश्चिन्तन न करना यह बात जन्मजन्मांतर के संस्कार में सिखाई नहींं जाती है। परिणामवश आत्मा को इसकी अनुभूति के लिए दिव्य व कठिन अवस्थाओं से भी गुजरना पड़ता है। पवित्रता ही वो स्थिति है जिसमे शांति निहित है। क्योँकि पवित्रता के बाद ही शांति का आगमन होता है। पवित्रता मौन को लेकर आती है। जब मन से दुसरोंं के लिए कोई बुराई ही नहींं रहती तो मुख, मन, बुद्धि, चिंतन सब मूक मौन हो जाते है। इनकी मौनता के बाद अपने आप शांति की अवस्था निर्माण होती है। जिस स्थिति में गहन सुखयुक्त शांति अनुभूति देती है..!!   ...