तमाशा

वेदनाओं से मुझे यू मोहब्बत हुई
बेदर्दी जमाने से भी मोहब्बत हुई

होती नही पूरी हर बात मन की
जिंदगी को ही खुशी से शिकायत हुई

मिलता नही किनारा डूबती कश्ती को
इंसानियत भी यहां बगावत हुई

खुदा के बच्चो की हसीन खुदाई
रब की बदनाम वो भीअमानत हुई

खाली हाथ आना जाना है फितरत
जिस्मानी इश्क ही अदावत हुई

सरे आम लुटे वफ़ा को वहशी दरिंदे
कुछ इस कदर मक्कारी से मोहब्बत हुई...!!
🌹
- वृषाली सानप काले

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