हम ही किसीके हो न सके

हमने तो कुछ न चाहा रब से
तेरे पहले बस मागु मौत कब से।

हमने तो कुछ न चाहा रब से
तुझसे चाहू सारे गम मैं कब से।

हमने तो कुछ न चाहा रब से
जीवन हो शुरू बस तेरे दम से।

हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
दे दू दुवा मैं तुम्हे हर महफ़िल से।।

हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
तू मेरा बस बनी धरती ये जब से।।

हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
हम एक दूजे के है लाख जन्म से।।

हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
तरसे मेरी साँसे मिलन को कब से

धरती बनी ये शायद जब से
तेरे पहले चाहू मौत मैं कब से..।
🌴
वृषाली सानप काळे

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