हमने तो कुछ न चाहा रब से
तेरे पहले बस मागु मौत कब से।
हमने तो कुछ न चाहा रब से
तुझसे चाहू सारे गम मैं कब से।
हमने तो कुछ न चाहा रब से
जीवन हो शुरू बस तेरे दम से।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
दे दू दुवा मैं तुम्हे हर महफ़िल से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
तू मेरा बस बनी धरती ये जब से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
हम एक दूजे के है लाख जन्म से।।
हमने तो कुछ भी न चाहा रब से
तरसे मेरी साँसे मिलन को कब से
धरती बनी ये शायद जब से
तेरे पहले चाहू मौत मैं कब से..।
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वृषाली सानप काळे
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