जन्मों का फेरा

मतलबी दुनिया मे जन्मकर बस मतलब न सिख सके
हिसाब चुकता कर ले ..
अब ऐ दिल..
तमाम जिंदगी के
कहकर थोड़ा सा
खिलती धूप की लहरों की
खुशी में चहकते पंछी
की तरह हम भी
परो को फड़फड़ाने निकले..!!

अगले पिछले सारे हिसाब
मिटाने थे हमें
तमाम उम्र के...
यू कहो कि जन्मजन्मांतर के...!!

सदियों से दिल मे दबाकर
रखी हुई कुछ दुख की
कुछ सुख की
कुछ अंनबन की
कुछ कण कण की,
अल्फाजो के दरमियान
तोड़कर कह गए राजे दिल...!!

कह गए बस कह गए...
बिना थके बिना रुके...
अब तक था जो जो सह गए...!!
हिसाब के हिसाबी बनने
की जिद में
न जाने क्या कितना बह गए..!!
जो बोले सो निहाल ही रहे
पर शायद तुझे रुला ही गए

दिल की कही जान पर बनी
नजरो में तेरी ले आये नमी
मेरी भी तो आंख कहाँ थी थमी
तू क्या जाने मेरे भावों की जमी

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती पे कुर्बान
मेरी आन,बान,शान,मान
तू वजूद मेरा तू मसीहा मेरा
पर चुकाना तो था जन्मों का फेरा

बस इतना बता दे जरा
क्या गिर गए तेरी नजरो में हम..??
क्या फिर गए अपनी वादों से हम..??
क्या मिट गए तेरी दोस्ती से हम..??
या चूक गए अपनी चाहत में हम..??

- वृषाली सानप काले

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