रिश्ता

रिश्तों ने हमको किया न गवारा
या रिश्तों का हमे मिला न सहारा..।

न बना कोई रिश्ता पाक हमारा
या रिश्ते में रिश्तेदार न था न्यारा...।

रिश्ते ने रुलाया तड़पाया हमे
फ़रिश्ते सा न कभी सजाया हमे..।

रिश्ते ने सदा ही आजमाया हमे
काँटो पथ पर ही चलाया हमे..।

मजाक सा जग ने देखा नजारा
रिश्ते ने हमको किया न गवारा..।।

जग क्या हमे आजमाता रुलाता
आत्मिक शक्ति को क्या सुलाता..।

न था किसमे दम के तड़पाता
अपने उसूलोसे हमे पहचानता..।

रिश्तों की दरिंदगी ने हमे मारा
रिश्ते ने हमको किया न गवारा...।।

जग पूछे अश्क़ो का बोलो कारण
रब कहे जी लो मैं हु ना तारण..।

सब कहे स्वार्थ से भरो आँगन
नैतिकता की तो मैं हु पुजारन..।

रिश्तों की बदनामी है न गवारा
रिश्तों ने हमको किया न गवारा..।।

जंग अपनों से लढके दिल ये टूटा
रंग सभीकें देखमहफ़िल से रूठा..।

संग न पाके जीवन से बेरुखा
भीख न दया न चाहे कुछ झूठा...।

हम चाहे रिश्तों से मूल्य हमारा
रिश्तों ने हमको किया न गवारा..।।
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- वृषाली सानप काले 

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