खामोशी

मिलन की प्यास बढ़ेगी
इसलिए अपनाई बेरुखी
तड़प ही करीब लायेगी
इसलिए अपनाई ख़ामोशी।।

दिलों का तो हुवा मिलन
आत्मा को भी संजीवन
अब कैसी है अड़चन
जब बना है तू साजन ।।

रुत बदली है बदलेगी
सुध निकली है निकलेगी
रुख बदली है सुधरेगी
परत उजली है उजलेगी।

भरोसे पे ही चले जहाँ
क्यों शको का फासला वहाँ
जिंदादिली की है बात यहाँ
आ बाहो में बस जा जानेजाँ ।।
🌷
- वृषाली सानप काळे

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