न करो ऐसे

न करो ऐसे करतब..
 के खफ़ होे जाए हम..।।

न भरो ऐसे पनघट
के आहो से भर जाए हम।।

न डरो ऐसे हमदम
के सहम हि जाए हम..।।

न हारो ऐसे प्रियतम
के मर ही न जाए हम..।।

न गिनो ऐसे पतझड़
के मौसम में बिखर जाए हम..।।

न लिखो ऐसे आफताब
के जल ही जाए हम...।।

न छूवो ऐसे दामन
के बेशरम होये हम..।।

न मलो ऐसे कागज
के मिट जाए ही हम..।।
🌲
वृषाली सानप काळे

Comments

Popular posts from this blog

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा की विशेषताएं

संस्कृत भाषा के शब्द भंडार से सम्बंधित बातें

इम्तिहान