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कसूर

तुझे चाहा क्या कसूर किया
तुझे पूजा ये कबुल किया।
तेरा सब दिन दीदार किया
प्यार तेरा एख्तिहार किया।।

तू रूठा तो ले पानी बने
तू टूटा तो ले सुई बने
तू झूठा तो ले धागा बने
तू पराया तो ले सगा बने
जीव तुम पर कुर्बान किया।।

तू पत्थर तो मैं लोहा बनु
तो परिस तो मैं सोना बनु
तू मिटटी तो मैं बीज बनु
तू भट्टी तो मै मद्य बनु।।
तुम पर तन भी साभार किया।
🏵️
वृषाली सानप काळे

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