हम भी धीरे धीरे

चाहने लगे उनको
हम भी धीरे धीरे
हाँ हो चुके उनके
तो हम भी धीरे धीरे।

नकारा भी जाए ना
ये आशियाना दिल का..।।
खो गए बाहो में उनके
हम भी धीरे धीरे।

फ़साना आशक़ी का
न बनाना था हमको..।।
बाजी इश्क़ की ही 
हारे हम भी धीरे धीरे ।।

नुरे मोहोब्बत कभी
बनना था हमको..।।
टूटे संजीदगी के द्वारे
हम भी धीरे धीरे।।

सबका होकर ही
रहना था हमको..।।
हाय कम्बख्त मेरा
भी हुवा धीरे धीरे।।

- वृषाली सानप काळे

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