पहेली

एक अजीब पहेली हुं मैं
जितना सुलझावोगे
उतनी उलझुंगि मैं
जितना भी खोलोगे।

वो पहेली ही रहनी होगी
वरना दुनिया टूटेगी
पहेली गर ये सुलझेगी
तो रिस्तो को बिखेरेगी।

कुछ कड़वे सच खोलेगी
तो गुलिस्तो को तोड़ेगी
जब महकेंगे फूल सारे
तो कांटे भी मुरझायेगी।
🤔
- वृषाली सानप काळे

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