पर....

जग सोया भी नहीं पर सोया है
रब रोया भी नहीं पर रोया है..!!

गीत गाया भी नहीं पर गाया है
सब खोया भी नहीं पर खोया है।

गम देखा भी नहीं पर देखा है
कब्र लिए भी नहीं पर लिखा है।

नम नेत्र किया भी नहीं पर किया
सब थम गया ही नहीं पर गया है..।

रंग छुटा भी नहीं पर छुया है
संग रूठा भी नहीं पर खोया है..।

अंग टूटा ही नहीं पर टूटा है
मन मिटा ही नहीं पर मिटा है।

तभी तो सब लूटा ही लूटा है
तभी हर जंग में हम मिटा है।

- वृषाली सानप काळे

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