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साईं बाबा कृपा करना

राम नाम से पत्थर भी तर जाते है समन्दर में , साईं राम नाम से संसार रूपी सागर तर जायेंगे। एक बार साईं राम नाम का रटन करके तो देख , दौडे आयेंगे साईं राम तेरी बिगड़ी बनाने के वास्ते। एक बार पुकार के तो देख बन्दे , साईं नाम आज़मा के तो देख। * * * कौशल्या वाघेला 

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी तुमने जो भी दिया हमने आँचल में लिया...!! ऐ जिंदगी तुमने जैसा भी दिया हमने वैसा ही लिया..!! ऐ जिंदगी तुझसंग ही जी लिया न कोई शिकवा किया..!! ऐ जिंदगी बस प्रेम ही तो किया बस प्रेम ही तो दिया..!! ऐ जिंदगी तुझ गुलाब की पंखुड़ियां सँझोने में हर पल गया..!! ऐ जिंदगी जन्मो की सौगात को न लिया तेरे दामन में अमृत पी लिया..!! ऐ जिंदगी गर्व तुझपर सदा  है किया सलाम झुककर है किया..! - वृषाली सानप काले

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You do not Have control on the doing You have to control On thinking But ultimately Thinking is based On the information... So be alert about What type of information You should feed up in the brain... Which information Gives you energy...?? Accept the perfect power... - Vrushali Sanap kale

दुवा की ताकत

     जिंदगी बहोत खूबसूरत है। लेकिन उसके अपने कुछ उसूल होते है, जिन्हें जानना तथा समझना अत्यंत जटिल होता है। जीवन अपनी धुन में बहता रहता है। हमे जीवन की रवानी में बहना है। बस ध्यान ये रखे कि ये रवानी किस दिशा एवम उद्दिष्ट को लिए भ रही है..?? ये विचार ही वो संस्कार है जो मनुष्य को मनुष्य तथा देवता एवं शैतान का करार देती है। ये सत्य है कि कोई भी मनुष्य लिखकर नहींं आता क्योंकि वो क्या और कैसे जीवन जियेगा, परन्तु ये बि सत्य है कि मनुष्य ही अपने कार्मिक एकाउंट के द्वारा अपनी प्रालब्ध तथा अपनी संचित जीवन की स्थिति स्वयं बनाता है।    वाचा, कर्म तथा मन के माध्यम से वह कर्म की गुह्यतम गति का शिकार हो जाता है। कोई भी जटिल कर्म भले ही न करे इंसान परन्तु अति छोटे से छोटे कर्म से भी उसका कार्मिक एकाउंट बनाता जाताय है। मनुष्य सबसे अधिक कर्म उसकी मन व वाणी से करता है। मन का हर विचार फिर वो सही हो या गलत जो, सत्य हो या असत्य हो, झूठ हो या सत्य हो, अच्छा हो या बुरा हो, पापी हो या पवित्र हो वो सत्य में कार्य कर जाताय है...!! जिस सत्य को इंसान नहींं जानता, यही से उसका...

रिश्ता (संवादात्मक कथा)

"कैसी हो राधिका..?" "ठीक हुँँ..?" "खुश हो..?" "शायद खुश भी..?" "शायद नहींं, यकीन से बोलो...?" "आज इतने दिनों बाद हम मिले है, क्या झगड़ने के लिए..?" "अरे झगड़ा नहींं पर ..दोस्त हुंं न तुम्हारा...?" "वो तो हो ही,रहोगे भी.." "उस दिन 2 महीने पहले तुम्हारी फोन पर सुनी आवाज, तुम्हारे साथ तुम्हारे पति ने किया बर्ताव..मारपीट,..वो रोती कलपती आवाज .. कैसे भूल सकता हुंं मैं..?? राधिका...?" "..." "पंख लगाकर आजाऊ ऐसी मेरी अवस्था थी..पर दुख ये था कि उस वक्त मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहींं कर सकता था...केवल तुमने डाली कसम की वजह से..." "तो क्या करे सागर..घर की बात चौराहे पे तो नहींं लायी जाती...?" "हाँँ, बिल्कुल सही मैं तो बाहरवाला हुंं न..?" "अगर ऐसा होता तो ये बात सबसे पहले तुमसे नहींं कहती दोस्त..." "अरे मेरा ये मतलब नहींं था, गलत न समझो.." "तुम तो मेरा सहारा हो, जो बात अपने पति, भाई, बहन, माँँ-बाप से भी नहींं कह सकती वो लाखो बाते ...

क्या है अध्यात्म (भाग - 12) आध्यत्मिकता व व्यवहार

    वास्तव में आध्यत्मिकता की दृष्टि समाज के मन मे न होने से ही समाज आज दुरावस्था का शिकार बन चुका है। आध्यत्मिकता को भय तथा शक की दृष्टि से देखा जाता है। सन्यासी, विरक्त व दूसरे लोक का विषय माना जाता है।    परन्तु आज के जीवन के सुखस्वरूप अवस्था की प्राप्ति का प्रमुख साधन अगर आध्यत्मिकता बन जाती है तो निर्विवाद धरती स्वर्ग बन जाती है।   आध्यत्मिकता के गुणों को धारण कर विजयी बनाना इतना आसान भी नहींं तथा इतना कठिन भी नहींं है। बस जरूरत है सही ज्ञान व सही तरीको की। जिसके द्वारा परिवर्तन के लिए दृढ़ता की अत्यंत जरूरत है। दृढ़ता के बगैर कुछ भी सम्भव नहींं है। अडिगता ही बदलाव की ताकत रखता है।    विचलित करनेवाली तमाम शक्तियां अडिगता के इर्दगिर्द भारी हुई है, जिनका कार्य ही विचलित एवं पराजित करना है। विकारों के कब्जे में लाना है।आध्यत्म के मार्ग को छुड़ाना है। बावजूद इसके इस मार्ग पर चलते रहना ही अडिगता है। इन सभी विचलित बातों से उभरना तो आना ही चाहिए।   स्वभाव व पूर्व जन्म संस्कार के कारण कई बार ये होता है कि टकराव अधिक तीव्र रूप ले ही लेत...

ताक़त

गुरु मेरी शक्ति         गुरु मेरी भक्ति गुरु बिन मिले न        जीवन को मुक्ति..।। गुरु बिन तरे भी         कैसे ये भवनिधि गुरु बिन नाही रे        कोई जीवन विधि...।। गुरु सच्चा पारिस         गुरु के ही वारिस गुरु साँचा मालिक        गुरु ही तो वालिद..।। गुरु मेरा तारक      गुरु मेरा चालक गुरु तेरे साधक     गुरु तेरे उपासक..।। गुरु न तो संकर       बीन जीवन कंकर गुरु एक मंतर       गुरु जीवन तंतर..।। गुरु भाग्यविधाता     गुरु जीवनदाता.. गुरु माता पिता     गुरु सबका त्राता..।। गुरु तेरी कृपा       मेरे सद्गुरु नाथा तेरे चरणों पर     मैं शीश नवाता..।। - वृषाली सानप काळे