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दुवा की ताकत

     जिंदगी बहोत खूबसूरत है। लेकिन उसके अपने कुछ उसूल होते है, जिन्हें जानना तथा समझना अत्यंत जटिल होता है। जीवन अपनी धुन में बहता रहता है। हमे जीवन की रवानी में बहना है। बस ध्यान ये रखे कि ये रवानी किस दिशा एवम उद्दिष्ट को लिए भ रही है..??

ये विचार ही वो संस्कार है जो मनुष्य को मनुष्य तथा देवता एवं शैतान का करार देती है। ये सत्य है कि कोई भी मनुष्य लिखकर नहींं आता क्योंकि वो क्या और कैसे जीवन जियेगा, परन्तु ये बि सत्य है कि मनुष्य ही अपने कार्मिक एकाउंट के द्वारा अपनी प्रालब्ध तथा अपनी संचित जीवन की स्थिति स्वयं बनाता है।

   वाचा, कर्म तथा मन के माध्यम से वह कर्म की गुह्यतम गति का शिकार हो जाता है। कोई भी जटिल कर्म भले ही न करे इंसान परन्तु अति छोटे से छोटे कर्म से भी उसका कार्मिक एकाउंट बनाता जाताय है। मनुष्य सबसे अधिक कर्म उसकी मन व वाणी से करता है।

मन का हर विचार फिर वो सही हो या गलत जो, सत्य हो या असत्य हो, झूठ हो या सत्य हो, अच्छा हो या बुरा हो, पापी हो या पवित्र हो वो सत्य में कार्य कर जाताय है...!! जिस सत्य को इंसान नहींं जानता, यही से उसका कार्मिक एकाउंट बनना सुरु हो जाता है। कई बार मनुष्य कुछ भी नहींं कहता, करता बस मन से सोचता रहता है, किसी के बारे में गलत या सही...वो सोच के विचार के समस्त वायब्रेशन्स उस इंसान तक जाते ही रहते है...!! फिर विचार जैसा हो वैसे भाव व परिणाम निकल आते है, यही बन गया उसका कार्मिक एकाउंट....!!

    ऐसे कितने कर्म इंसान करता ही रहता है जिससे निगेटिविटी बढ़ती जाती है। एक इंसान दूसरे इंसान के बारे में केवल सोचने से अगर इतना गहरा दुखभरा, कठिन परिणाम समस्त सृष्टि को नजर आ रहा है, तो क्योंं न हम दूसरों के बारे में केवल अच्छा सोचकर बस दुवांंऐ देते रहे तथा दुवांंऐ ही लेते रहे...!! अगर वायब्रेशन से जीवन के परिणाम होते है तो क्योंं न केवल पोझिटिव तथा सकारात्मक एवं दुवायुक्त ही वायब्रेशन दे दे, ताकि ये सृष्टि सम्पूर्ण प्रेमयुक्त भाव से पनप जाए...!!

   क्या ये मुमकिन नहींं...?? दुवाओंं के बड़ी ताकत है। दुवांंऐ ही जिंदगी को सुकून देती है। बाद दुवांंये देने से बढ़ दुवाये ही मिलती है। इसलिए न दो, न लो। दिल ही दिल से ये रूहानी सेवा कर लो।जिससे संसार सुखी हो जाएगा तथा आपका जीवन भी...!!

 न कोई गलत हिसाब कर्म बनाएंगे, न कोई हिसाब देना पड़ेगा, न कोई प्रालब्ध दुखयुक्त बनेगी न कोई पीड़ा युक्त संघर्षयुक्त कार्मिक एकाउंट बनेगी....!!

   आओ ...परमात्मा के बच्चे है तो उसकी इस दुनिया को सुंदर बनाए...!!कुछ करे...!!

- वृषाली सानप काले

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