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मोहब्बत

>>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<< मत तौल मेरी मोहब्बत को यूँ तराज़ू में मेरे मेहबूब, कहीं ये ना हो जाए कि पलडा़ मेरा भारी हो जाएँ। >>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<< मुहब्बत तो खुदा की इबादत है सनम, यूँ नाप तौल में उसकी तोहमत ना कर। >>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<<< हिसाब करनेवाले क्या जानें मोहब्बत की अहमियत, मेरे सनम कितनी नेमतों से मिला खुदा का तोहफ़ा है। >>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<< हम तो आपकी मोहब्बत में खुद को भूला बेठे, और आप उस मोहब्बत का हिसाब लगा बेठे। >>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<...

श्याम का आना (ग़ज़ल)

¶ विधा - ग़ज़ल/गीतिका ¶ काफिया - आना ¶ रदीफ़ - बन गया ************************************** (श्याम को समर्पित भाव) तेरे आने से सारा आलम, श्याम सुहाना बन गया, तेरी सांवली सूरत देख, मेरा दिल दीवाना बन गया तेरा मंद-मंद मुस्कुराना मेरा दिल हुआ चोरी बस, तेरी जुबां से निकला हर लफ्ज़ इक तराना बन गया तेरी नज़र का मिलाना, घायल हुआ मेरा दिल, तेरा ये अंदाज कान्हा मेरे नयन छलकाना बन गया तेरा साँसें चलाना मेरे चित्त को महाकाये जाए है, तेरा नाम गुनगुनाना श्याम मेरी धड़कन का फ़साना बन गया तेरी बाँसुरी सुनाना मेरे सोए भाग जाग जाए श्याम, तेरी यादों का झिलमिलाना मुझे रुलाना बन गया ********************************* - कौशल्या वाघेला

श्याम अपना ले

कान्हा मुझ पर भी अपनी प्रेम भरी नजर डालो ना मुझे भी अपनी बाँसुरी के स्वर से वशीभूत कर लो ना, हे मुरारी..तुम्हारे प्रेम में मुझे भी डुबो दो ना, हे बंसी बजैया मुझे भी गले से लगा लो ना, गले से लगाकर अपनी धडकने सुना दो ना, हर चिंता से मुक्त हो जाऊ, दिल में तुम बसा लो ना, हे मधुकर मुझे भी अपने चरणों में स्थान दे दो ना, मेरा हाथ पकड़कर मुझे भी अपना लो ना, मैं भी करना चाहूँ तेरी भक्ति, तेरे चरणों में करू समर्पित मेरा जीवन, आ कर सांवरियां मेरी बांह थाम लो ना - कौशल्या वाघेला

श्याम तेरी आँखें

(दोहा छंद)  मेरी आँखो में श्याम, तू इस कदर बस जा,  जहाँ भी मैं देखूँ तो, तू ही एक नज़र आ ।1 तेरी आँखों में देख, महोब्बत मेरे लिए, ओ श्याम हम तो तेरे, यूँ दिवाने बन गए। 2 तेरी आँखों की कशिश, खींचे तेरी ओर। मेरा मन तुझमें रमा, और न कोई ठौर।।3 उसकी आई याद जब, मन रहता बेचैन। सब कुछ बैठी भूल मैं, खोया मन का चैन।।4 >>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<< - कौशल्या वाघेला

श्याम मिल जाए

श्याम तू कहाँ, मेरा मन तेरे पीछे भागे, नयन तेरे दर्शन को तड़पते, ओ श्याम... कहाँ ढूंढे तुझे, तू ही आके बता जा, ओ श्याम... तेरी बांसुरी की धुन, मुझे खींचे तेरी ओर तू ही मेरे मन में रमता, कब आओगे श्याम, ओ श्याम... तेरी प्रेम सभर मीठी नज़र, मेरे मन को व्याकुल कर देती है, ओ श्याम... - कौशल्या वाघेला

इम्तिहान

जन्म-मृत्यु के बीच है जीवन, जीवन चक्र का पहिया अद्भुत, उतार चढ़ाव है उसकी फेरी, अटल नियम है आगे बढ़ना, पीछे को पग भर न हटना, समय के साथ है मिलकर चलना, आ जाती संजोग की आँधी, सब्र इम्तिहान लेने को आतुर, पिस जाते इस कठोर आलम में, बच पाना मुश्किल है फिर भी, जूझता रहता है लेकिन, हारता नहीं अपनी हिम्मत, है लक्ष्य को हांसिल करना, एक मात्र ध्येय है उसका,  आग में तप कर निखरता है सोना, ऐसे ही ये भी अपने.... अनुभवों की आग में तप कर निखरता, हैं इंसान प्राण ऊर्जा से भरपूर, गंतव्य को है प्राप्त होता। - कौशल्या वाघेला 

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा की विशेषताएं

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा की विशेषताएं : *        प्राचीन आर्य भाषा में 13 स्वर ध्वनियाँ थी। जिसमे 9 स्वर थे – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, लृ *        चार संध्य स्वर थे – ए, ऐ, ओ, औ *        ‘ऐ’ और ‘औ’ का उच्चारण क्रमशः ‘आई’ एवं ‘आउ’ होता था। *        व्यंजनों के पांच वर्ग बन चुके थे – 1)      क वर्ग 2)      च वर्ग 3)      ट वर्ग 4)      त वर्ग 5)      प वर्ग *        इसके अतिरिक्त चार अर्ध स्वर – [ य, र, ल, व ] एवं तीन उष्म – श, ष, स तथा एक महाप्राण ‘ह’ ध्वनियाँ थी। *        एक अनुनासिक (ं) एवं एक विसर्ग (ः) भी था। शब्दों के रूप, लिंग (तीन), वचन (तीन) एवं कारक (आठ) के आधार पर बनते थे। *        विशेषण संज्ञा के समान ही परिवर्तित होते थे। सर्वनामों के रूप मे...