इम्तिहान


जन्म-मृत्यु के बीच है जीवन,
जीवन चक्र का पहिया अद्भुत,
उतार चढ़ाव है उसकी फेरी,
अटल नियम है आगे बढ़ना,
पीछे को पग भर न हटना,
समय के साथ है मिलकर चलना,
आ जाती संजोग की आँधी,
सब्र इम्तिहान लेने को आतुर,
पिस जाते इस कठोर आलम में,
बच पाना मुश्किल है फिर भी,
जूझता रहता है लेकिन,
हारता नहीं अपनी हिम्मत,
है लक्ष्य को हांसिल करना,
एक मात्र ध्येय है उसका, 
आग में तप कर निखरता है सोना,
ऐसे ही ये भी अपने....
अनुभवों की आग में तप कर निखरता,
हैं इंसान प्राण ऊर्जा से भरपूर,
गंतव्य को है प्राप्त होता।

- कौशल्या वाघेला 

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