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तुम्हारी याद

तुम्हारी याद - Kaushalya जब बात कोई निकले, मुझे  तुम याद आए जब ज़िक्र किसिका हो,  मुझे तुम याद आए ना जाने हर बात पर,  मुझे तुम याद आए कहीं ख्वाब कोई देखा,  मुझे तुम याद आए जब सुनी कोई सरगम,  मुझे तुम याद आए शमा की हर शै पर ,  मुझे तुम याद आए मौसम के हर रुख़ पर,  मुझे तुम याद आए खुशियाँ ही खुशियाँ हो जब,  मुझे तुम याद आए एहसास नया हो जब,  मुझे तुम याद आए तन्हाइयों में जब मेरी,  मुझे तुम याद आए ये आँख हुयी नम तो,  मुझे तुम याद आए आहट सी कोई आये तो,  मुझे तुम याद आए मेरी सोच की गहराई में,  मुझे तुम याद आए मेरी उलझी हुई दुनिया देख, मुझे तुम याद आए । *

वस्तु नही हु मैं... (on Women's Day)

रोज की नयी सुबह की दहलीज में  पड़नेवाली कोई अखबार नहीं हूँ मै... हर सुबह-सुबह जन्मकर शाम को  फेंकी जानेवाली रद्दी भी नही हु मैं...!! किसी भी दीवार के  कोने में लटका हुवा कैलेंडर भी नहीं हूँ मैं...!! नाही समारोह की पूजा की थाली एवं जुड़े में खोंसी गयी माला  या कोई सुगंधित फूल  वो भी नहीं हूँ मैं...!! गौर से सुना ही दु  अब  मैं भी इस जग को के खिड़की की किसी  कांच में सटकर लगी   धूल भी नही  हूँ मैं...!! शोभा नही,साज नही, आभा नही,अंदाज नही वाद नही,राग भी नही... एक बुलन्द आवाज हु मैं..!! अंत भी  तथा आगाज भी हु मैं..!! एक जिंदादिल इंसान हु मैं...!! सुनो....कोई वस्तु नही हु मैं...!! इसलिए अब पोंछकर साफ  करना ही होगा तुम्हे प्रथा,परम्परा,व्यवस्था का आईना...!! हवस,वासना व दम्भ से युक्त इस समाज  के हवेली की खिड़की की कांच में लगा अंधविश्वास,  अनैतिकता व आडम्बर का दाग...!! विश्व की शांति ,सुकून व नारी के सम्मान के लिए...!! - वृषा...

क्या है आध्यात्म..? (भाग-14) [परमपिता परमात्मा भाग 1]

परमपिता परमात्मा भाग १ ********************* जिस तरह एक जानवर का पिता जानवर होता है। इंसान नहींं होता उसी तरह एक आत्मा का पिता जो होता है वो भी आत्मा ही होता है। अर्थात मनुष्य देह में स्थित सभी आत्माओं का भी एक पिता होगा। जो सभी आत्माओं से श्रेष्ठ व महान भी होगा। आत्मा जैसे निराकार है वैसे ही आत्मा का बाप अर्थात पिता भी निराकार ही होगा वो निराकार बाप  ही  "परमपिता परमात्मा" है...!!  वो निराकार परमात्मा जो सभी आत्माओं का बाप है वो जाहिर है बच्चो से थोड़ा तो अलग होगा। वो परमात्मा देह में कभी भी नही बंधता, इसीलिए वह न कभी जन्म लेता न कभी मरता है। वह अजेय, अमर, अनंत, अविनाशी, निराकार व अलौकिक शक्तिरूप है...!! जो इस सृष्टि का निर्माता, रचैता, रक्षक, एवं वही इसका विनाश भी करता है, निश्चित समय के पश्चात...!! शांति, सुख, आनंद, प्रेम, शक्ति, पवित्रता, ज्ञान, सत्यता का सागर है परमपिता परमात्मा...!! परमपिता परमात्मा जिसने इस सृष्टि की रचना की क्योँकि वही इसका रचयिता है। जो रचैता होता है वह रचना के भीतर नहींं आता बल्कि रचना के बाहर रहकर रचना का अवलोकन करता है...!! तो परम...

અષાઢી મેઘ

અષાઢી મેઘ - Kaushalya ભીની માટી ની સોડમ આવે, મને બચપન ની યાદ સાંભરી, આજ આ ખુશનુમા મૌસમ માં મન મૂકી ઝૂમવા ચાહે, મન પ્રફુલ્લિત છે આજ, ભીંજાય જાવ આજ મન મૂકી ઝરમર મેહ વરસે આજ, માટી ની મહેક પ્રસરી રહી અષાઢની રઢિયાળી રાત માં, મન પણ તેના રંગ માં રંગાવા ચાહે.... ****

बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

बरखा : मौसम-ऐ-शरारत - Kaushalya करवट बदली मौसम ने, और अंगडाई ली हवाओं ने लहरायी चुनरियाँ बदलो ने, आसमान में फैलाया आँचल धरती ने सज़ा रूप नया चारों तरफ फैली हरियाली देखो वो.... उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे शरारत तो देखिए मौसम की, झूमता हुआ सावन आया याद ले आई आपकी मन चाहे कि.... ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ ले आए आपको हमारे पास और मेघ बन बरसे आप का स्नेह बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ, कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की। मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ आया सावन चित्त चुराने प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन आयी ऋतु रंग सजाने की, प्रकृति से मन तक पहुँचने की। ***

અવસર (अवसर)

અવસર - Kaushalya અવસર મડ્યો આજ ગુમવવો નથી, બે મીઠી વાત કરી લવ તમારી સાથ. આ અમૂલ્ય ક્ષણ હવે વેડફવી નથી, યાદગાર બનવી લવ મારી આ સ્મૃતિ. અવસર આવો મડે ના ફરી, આવ કરિશ્મા સર્જાતા હોય છે કદી. ******** अवसर - Kaushalya अवसर मिला है आज गुमाना नहीं, दो मीठी बात कर लू आपके साथ। ये अमूल्य क्षण अब गवाना नहीं है , यादगार बना लू अपनी ये स्मृति। अवसर ऐसा मिले न फ़िर से, ऐसे करिश्मा सृजन होता है कभी। *

आपका आना

आपका आना - Kaushalya सुरमयी शाम लाती है रात का पैगाम , होती  है हर रात की सुबह नयी, भोर से होती है हर दिन की शुरुआतनयी, वैसे  ही.... आप आए सुबह की भोर बनके, और मेरे जीवन की हुयी शुरुआत नयी। (*_*)