Skip to main content

Posts

क्या है आध्यात्म..? (भाग-14) [परमपिता परमात्मा भाग 1]

परमपिता परमात्मा भाग १ ********************* जिस तरह एक जानवर का पिता जानवर होता है। इंसान नहींं होता उसी तरह एक आत्मा का पिता जो होता है वो भी आत्मा ही होता है। अर्थात मनुष्य देह में स्थित सभी आत्माओं का भी एक पिता होगा। जो सभी आत्माओं से श्रेष्ठ व महान भी होगा। आत्मा जैसे निराकार है वैसे ही आत्मा का बाप अर्थात पिता भी निराकार ही होगा वो निराकार बाप  ही  "परमपिता परमात्मा" है...!!  वो निराकार परमात्मा जो सभी आत्माओं का बाप है वो जाहिर है बच्चो से थोड़ा तो अलग होगा। वो परमात्मा देह में कभी भी नही बंधता, इसीलिए वह न कभी जन्म लेता न कभी मरता है। वह अजेय, अमर, अनंत, अविनाशी, निराकार व अलौकिक शक्तिरूप है...!! जो इस सृष्टि का निर्माता, रचैता, रक्षक, एवं वही इसका विनाश भी करता है, निश्चित समय के पश्चात...!! शांति, सुख, आनंद, प्रेम, शक्ति, पवित्रता, ज्ञान, सत्यता का सागर है परमपिता परमात्मा...!! परमपिता परमात्मा जिसने इस सृष्टि की रचना की क्योँकि वही इसका रचयिता है। जो रचैता होता है वह रचना के भीतर नहींं आता बल्कि रचना के बाहर रहकर रचना का अवलोकन करता है...!! तो परम...

અષાઢી મેઘ

અષાઢી મેઘ - Kaushalya ભીની માટી ની સોડમ આવે, મને બચપન ની યાદ સાંભરી, આજ આ ખુશનુમા મૌસમ માં મન મૂકી ઝૂમવા ચાહે, મન પ્રફુલ્લિત છે આજ, ભીંજાય જાવ આજ મન મૂકી ઝરમર મેહ વરસે આજ, માટી ની મહેક પ્રસરી રહી અષાઢની રઢિયાળી રાત માં, મન પણ તેના રંગ માં રંગાવા ચાહે.... ****

बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

बरखा : मौसम-ऐ-शरारत - Kaushalya करवट बदली मौसम ने, और अंगडाई ली हवाओं ने लहरायी चुनरियाँ बदलो ने, आसमान में फैलाया आँचल धरती ने सज़ा रूप नया चारों तरफ फैली हरियाली देखो वो.... उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे शरारत तो देखिए मौसम की, झूमता हुआ सावन आया याद ले आई आपकी मन चाहे कि.... ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ ले आए आपको हमारे पास और मेघ बन बरसे आप का स्नेह बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ, कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की। मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ आया सावन चित्त चुराने प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन आयी ऋतु रंग सजाने की, प्रकृति से मन तक पहुँचने की। ***

અવસર (अवसर)

અવસર - Kaushalya અવસર મડ્યો આજ ગુમવવો નથી, બે મીઠી વાત કરી લવ તમારી સાથ. આ અમૂલ્ય ક્ષણ હવે વેડફવી નથી, યાદગાર બનવી લવ મારી આ સ્મૃતિ. અવસર આવો મડે ના ફરી, આવ કરિશ્મા સર્જાતા હોય છે કદી. ******** अवसर - Kaushalya अवसर मिला है आज गुमाना नहीं, दो मीठी बात कर लू आपके साथ। ये अमूल्य क्षण अब गवाना नहीं है , यादगार बना लू अपनी ये स्मृति। अवसर ऐसा मिले न फ़िर से, ऐसे करिश्मा सृजन होता है कभी। *

आपका आना

आपका आना - Kaushalya सुरमयी शाम लाती है रात का पैगाम , होती  है हर रात की सुबह नयी, भोर से होती है हर दिन की शुरुआतनयी, वैसे  ही.... आप आए सुबह की भोर बनके, और मेरे जीवन की हुयी शुरुआत नयी। (*_*)

कविता की रचना

कविता की रचना - Kaushalya पुराना ही ये स्वर है, अंकुर फूटे मन् में, इसलिए लगता नया है। वही है शब्द भंडार, इर्द-गिर्द बिखरे शब्द, पिरोये एक माला में, बन गई नयी सचना, उसका नाम रखा कविता। ***

सवेरा

सवेरा - Kaushalya कितना हसीन है मौसम, परिंदों के कलरव से उठा सवेरा, रंग-बे-रंगी आसमान से आच्छादित सृष्टि सारी, सूर्योदय की किरणों ने बिखेर दिया अपना साम्राज्य, शबनम ने लहरायी अपनी भीगी चुनरियाँ, मन्द-मन्द समीर के झोंके आ रहे, मयूर की आवाज़ से गूंज उठा सवेरा, फूलों ने मुस्कुराकर अपनी खुश्बू बिखेर दी, मन्दिर की घंटी का मधुर स्वर है दिशाओं में, वातावरण की हलकी शान्ति ने चित्त चुराया, खुशनुमा नज़ारा देखते ही मन् प्रफुल्लित हो उठा। ^_^