रिश्ते जो जीवन को महक देते है। भले वो खून के हो या प्रेम के, भाव के हो या सद्भाव के, आह! से भरे हो या चाह से, स्नेह से पूरे हो या गेह से, वृत्ति से जुड़े हो या कृति से, नीति से भरे हो या गीति से, लेकिन कुछ रिश्ते....कैसे भी हो वो दिल के गहराई में घुले होते है। जग की समस्त शब्दकोशों से वो न्यारे होते है। भाव भंगिमा की ताकत के लहजे से परिपूर्ण होते है, जज्बात उनकी पहचान एवं ताकत होती है लेंन देंन जहां गौण होता है। व्यवहार की डिक्शनरी को वो कभी महत्व नही देते। फायदे से ज्यादा वो घाटे के सौदे को पसंद करते है। उन्हें सांतवां आसमान को पाने की चाह नही होती उन्हें बस दिलो के राजमहल की संपत्ति की चाह होती है। उन्हें वस्तुओं की कीमत नही तो रूहानी जज्बातों की कदर होती है। ये जज्बात ही उनकी ताकत, हिम्मत, वजूद होती है। जिनके लिए मिटना एवं बिकना भी उन्हें मंजूर होता है। ऐसे ही रिश्ते जीवन को अनोखा बना देते है। जीवन को अनमोलत्व प्राप्त करता देते है। ऐसे ही चंद रिश्ते...जो मेरे जिंदगी भर की पूँजी है...जिंदगी की संपत्ति है...तथा सदैव रहेगी। जिन में हर कोई साशामि हो...
“मेरी लेखनी का उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि विचारों का जागरण है।”