शिकायत नही है

मुझे शिकायत नहीं  है
अपनी सिसकियों से ...
ना ही अपनी आहो से..

मुझे शिकवा नही है
अपने व्यक्त-अव्यक्त रिश्तों से ..
ना ही अपने रिश्तेदारों से..

मुझे गीला भी नही है
अपने दर्द से लथपथ अतीत से..
ना ही अपने दर्द के दाता ओ से..

मुझे रुसवाई नही है
अपने मासूम सपनो से..
ना ही संघर्ष रत इरादों से...

मुझे नाराजी नही है
अपने न समझे अनुभवों से..
ना कभी भी कहे न कहे जज्बातों से..

तभी तो आज...
मुझे दिललगी हुई न दुनिया से..
न शिकायत जिंदगी से...
ना ही कभी मौत से...!!
****
- वृषाली सानप काले

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