अधूरा सफ़र

................अधूरा सफ़र............. 

"सफ़र में ही ज़िंदगी की खुशियाँ बसी है, 
मंज़िल पर तो सब कारवाँ ख़त्म होते है।

हसरतें पूरी होती तो जन्नत है दुनिया में,
नहीं तो खाली बेवजह भटकते ज़ज्बात।

तुम और मैं से शुरू होकर हम पे ख़त्म हो, 
मेरे दिल में तस्वीर यार तेरी उभरती दिखीं। 

तेरी ही बातें रह रह कर सुनाई देती है, 
होकर दूर तुम और भी पास आते गए। 

जानती हूं तू भी वहां चैन नहीं पाए हो, 
अपने मिलन की अब कोई गुंजाइश नहीं। "
***
- कौशल्या वाघेला 

Comments

  1. Replies
    1. 🇮🇳शुक्रिया महोदय 🙏
      कविता का भाव आप तक स्पष्टता से पहुंच सका 🙏

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