राम नाम की रेखा-रेखा में,
मन को नव विश्वास मिले।
कलम तुम्हारी सत्य लिखे,
शब्दों को मधुमास मिले।
चिंतन हो कल्याणमय,
जागरण का भाव रहे।
‘कुंदन’ की लेखनी में सदा,
सत्य का उज्ज्वल प्रभाव रहे।
जब-जब मन विचलित होगा,
राम-नाम आधार बने।
जीवन-पथ के कठिन क्षणों में,
प्रभु ही दृढ़ पतवार बने।
अंतरमन के सूने कोने,
भक्ति-सुधा से भर जाएँ।
संशय, भय और मोह के बादल,
राम-किरण से हर जाएँ।
लेखनी केवल शब्द न रचे,
मानवता का गीत लिखे।
हर पंक्ति में करुणा झलके,
हर अक्षर नव प्रीत लिखे।
सत्य, धर्म और प्रेम-पथिक को,
नव संबल हर बार मिले।
राम-नाम की रेखा-रेखा में,
जीवन को विस्तार मिले।
जब तक साँसें साथ चलें,
प्रभु का पावन ध्यान रहे।
मेरे हर शब्द, हर कर्म में,
श्रीराम का सम्मान रहे।
— कौशल्या वाघेला ‘कुंदन’

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