हे प्रभु श्रीराम!
यह जीवन आपका है, यह श्वास आपकी है, यह चेतना आपकी है।
हमारे अंतर्मन को सत्य, धैर्य और करुणा के प्रकाश से आलोकित रखें।
हमारी वाणी में मधुरता, कर्म में निष्ठा और विचारों में पवित्रता बनी रहे।
हमारा प्रत्येक विचार लोकमंगल का कारण बने और प्रत्येक कर्म मानवता के हित में समर्पित हो।
हमें ऐसा विवेक दें कि सत्य का मार्ग कभी न छूटे, और ऐसी विनम्रता दें कि सफलता भी हमारे भीतर अहंकार का जन्म न दे।
हमारे जीवन का प्रत्येक क्षण आपके स्मरण, सेवा और सद्कर्मों से सुगंधित हो।
जो भी करें, वह आपके स्मरण और लोकमंगल का माध्यम बने।
आपकी इच्छा ही हमारा मार्ग बने, और आपका नाम ही हमारी शक्ति।
जय श्रीराम। 🙏
“प्रार्थना वह नहीं जो केवल होंठों से निकले;
प्रार्थना वह है जो अंतर्मन को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दे।”
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