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हिंदी भाषा-शिक्षण में मौखिक एवं लिखित अभिव्यक्ति

 


🌷 हिंदी भाषा-शिक्षण में मौखिक एवं लिखित अभिव्यक्ति

🌸 भूमिका

भाषा का मूल उद्देश्य अपने विचारों, भावों, अनुभवों और ज्ञान को दूसरों तक पहुँचाना है। यह अभिव्यक्ति मुख्यतः मौखिक और लिखित, दोनों रूपों में होती है।

विद्यार्थी अपने विचारों को बोलकर व्यक्त करता है तो वह मौखिक अभिव्यक्ति है और उन्हें लिखकर प्रस्तुत करता है तो वह लिखित अभिव्यक्ति कहलाती है। भाषा-शिक्षण में दोनों प्रकार की अभिव्यक्ति का विकास आवश्यक है।

1. मौखिक अभिव्यक्ति का अर्थ

अपने विचारों, भावों, अनुभवों और सूचनाओं को बोलकर स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की क्षमता मौखिक अभिव्यक्ति कहलाती है।

मौखिक अभिव्यक्ति में केवल बोलना ही नहीं, बल्कि उचित शब्द-चयन, शुद्ध उच्चारण, स्वर, गति और परिस्थिति के अनुसार भाषा का प्रयोग भी महत्वपूर्ण है।

2. लिखित अभिव्यक्ति का अर्थ

अपने विचारों, भावों, अनुभवों और कल्पनाओं को लिखित रूप में स्पष्ट, क्रमबद्ध एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता लिखित अभिव्यक्ति कहलाती है।

इसमें भाषा की शुद्धता के साथ-साथ विचारों की स्पष्टता, क्रमबद्धता, शब्द-चयन और वाक्य-विन्यास का महत्व होता है।

3. मौखिक अभिव्यक्ति का महत्व

मौखिक अभिव्यक्ति के विकास से विद्यार्थी—

  • अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है।
  • आत्मविश्वास के साथ बातचीत करता है।
  • प्रश्न पूछने और उत्तर देने में सक्षम होता है।
  • चर्चा एवं संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
  • परिस्थिति के अनुसार भाषा का प्रयोग करना सीखता है।

4. लिखित अभिव्यक्ति का महत्व

लिखित अभिव्यक्ति के विकास से विद्यार्थी—

  • विचारों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करता है।
  • शुद्ध भाषा और वर्तनी का प्रयोग करना सीखता है।
  • विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिख सकता है।
  • पत्र, अनुच्छेद, निबंध, संवाद आदि लिखने में सक्षम होता है।
  • अपनी कल्पना और सृजनात्मकता को लिखित रूप देता है।

5. मौखिक अभिव्यक्ति के विकास की गतिविधियाँ

मौखिक अभिव्यक्ति विकसित करने के लिए शिक्षक—

  1. प्रश्नोत्तर
  2. संवाद
  3. चर्चा
  4. कहानी-कथन
  5. चित्र-वर्णन
  6. घटना-वर्णन
  7. कविता-पाठ
  8. भाषण
  9. भूमिका-अभिनय

जैसी गतिविधियों का प्रयोग कर सकता है।

इन गतिविधियों में विद्यार्थी स्वयं भाषा का प्रयोग करता है, जिससे उसकी मौखिक अभिव्यक्ति अधिक सहज होती है।

6. लिखित अभिव्यक्ति के विकास की गतिविधियाँ

लिखित अभिव्यक्ति के लिए विद्यार्थियों को—

  1. वाक्य-लेखन
  2. अनुच्छेद-लेखन
  3. चित्र-वर्णन
  4. पत्र-लेखन
  5. संवाद-लेखन
  6. कहानी-लेखन
  7. निबंध-लेखन
  8. अनुभव-लेखन
  9. सृजनात्मक लेखन

का अभ्यास कराया जा सकता है।

7. शिक्षक की भूमिका

शिक्षक को दोनों प्रकार की अभिव्यक्ति के लिए विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर देने चाहिए। मौखिक अभिव्यक्ति में उन्हें बोलने और संवाद करने के अवसर तथा लिखित अभिव्यक्ति में स्वतंत्र रूप से विचार लिखने के अवसर मिलने चाहिए।

विद्यार्थियों की त्रुटियों का सुधार करते समय शिक्षक को उनके प्रयास को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि उनमें भाषा के प्रति झिझक न उत्पन्न हो।

8. मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति का संबंध

मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। विद्यार्थी बोलकर अपने विचारों को व्यवस्थित करना सीखता है और वही विचार आगे लिखित रूप में भी व्यक्त कर सकता है।

इसलिए भाषा-शिक्षण में दोनों के विकास को पूरक रूप में देखना चाहिए।

🌸 निष्कर्ष

हिंदी भाषा-शिक्षण का उद्देश्य केवल विद्यार्थी को भाषा के नियमों का ज्ञान कराना नहीं, बल्कि उसे अपने विचारों और भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने योग्य बनाना भी है। मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति के निरंतर अभ्यास से विद्यार्थी भाषा का प्रयोग अधिक सहज, स्पष्ट और सृजनात्मक ढंग से करना सीखता है।



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