जन्मदिन

जन्मदिन... अर्थात जन्म का दिन..!! हर एक के लिए यह दिन महत्ववपूर्ण होता है, परन्तु क्यो..?? जन्म लेकर हम इस सृष्टि रंगमंच पर अपनी भूमिका निभाने आते है, यह अत्यंत आनंद व खुशी की बात है। तथापि हर साल जन्म दिन क्यो मनाया जाता है..?? हर साल की बढोउती का तो यही अर्थ निकलता है, कि हमारी जिंदगी का एक साल गुजर गया..!! एक एक करते कितनी सारी जिंदगी हम गुजार देते है...!! कभी तो पीछे मुड़कर देखना चाहिए कि - 
आजतक की जिंदगी हमने कैसे गुजारी...?? 
कितनो की जिंदगी सुधारी..?? 
कितनो की जिंदगी बिगाड़ी..?? 
कितनी आंखे पानी से भर दी..?? 
कितनी आंखों का पानी पिया..?? 
कितनो की दवा ली..?? 
कितनो की बद दुवा ली..?? 
कितनो को दुवा दी..?? 
कितनो को बद दुवा दी...?? 
कितने पल सफल बनायें..?? 
कितने पल बेकार गवाए..?? 
कितने मूल्य संस्कार स्वीकार लिए..धारण किये..?? 
कितने संस्कार नष्ट किये..?? 

इन सबका लेखा जोखा करने का पल याने निश्चित जन्मदिन...!! अगर इन प्रश्नों का उत्तर हाँ है... तो बहोत बढ़िया...!! परन्तु एक भी ना है तो इस दिन जरूरी है वो संकल्प करना, की अब इन गलतियों को दोहराना नही है...!! जब आंख खुले वही सबेरा...!!

फिर ऐसी क्या वजह होगी कि न जाने कब से लोग अपना जन्मदिन बड़ी खुशी से मनाते है... अमीर भी व गरीब भी...!! किसी भी जाति, धर्म, वर्ण, पंथ, भाषा की मर्यादा इसमें नही होती। धूमधाम से मनाना याने खुशी जाहिर करना ... फिर कौनसी खुशी इससे जाहिर की जाती है..??

आप कहेंगे क्यो ये बेतुके सवाल मेरे द्वारा उठाये जाते है..?? जहां तक मेरी बात है, मैं उठाये जानेवाले हर सवाल का जवाब पहले ढूंढ लेती हूं फिर सबको बताती हु..!!

ये सवाल कई सालों से मेरे ही दिमाग मे हजार बार पैदा हुवा... तब इसका गहन अध्ययन करने के पश्चात मुंह इसका उत्तर आध्यत्म में मिला...!!

जी हाँ, यह बात तो सत्य है, की हर एक जन्मदिन हमारी जिंदगी कम करता जाता है। फिर भी देह को चलानेवाली वह निराकार शक्ति जिसका नाम आत्मा है, वह जानती है, की मेरा बाप वह निराकार परम पिता परमात्मा वह ऊपर आसमान के अत्यंत गहराई में परम धाम में रहता है। उसने हम बच्चो को अर्थात आत्माओ को इस सृष्टि रंगमंच पर 5000 वर्ष पहले भेजा था...!! तबसे अब तक कितने बहके, भटके, भूले, चुके, बिगड़े है हम आत्माये..!! जैसे जैसे ज मरण का ये चक्र पूरा होगा वैसे वैसे हमारा ड्रामा भी पूरा होगा। जब ड्रामा पूरा होगा तब ही आत्मा पवित्रता के पथ पर चल अपने बाप के पास, बाप के घर परम् धाम जा सकेगी..!!

इसलिए हर जन्म दिन वह अच्छे से अच्छे संकल्प कर अपने पापों का बोझा कम करती है, व पवित्र बनने का प्रयास करती है। तो जन्मदिन इसलिए धूम धाम से मनाती है, की चलो एक साल कम हुवा अब जल्दी बाप के घर जाना है...!! अब ससुराल बहोत जी लिया मुझे मायके जाना है...ये खुशी जाहिर करती है..!! अर्थात इन बातों को उन्ही पर लागू समझे जो काया, वाचा व मन से पवित्रता के पद पर चल रहे हो,जो नही उनकी बात न करे...!!

ओम शांति

- वृषाली सानप काले

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