Posts

Showing posts from May, 2019

राधा कौन थी..??

राधा कौन थी..?? ******************** सदियों से आज तक  सारे अंतराल को  लांघकर भी  मेरा तुम्हारा रिश्ता.. आज भी वैसा ही है...!!
फिर भी निकले  महज एक अनकहा सवाल  क्या मंजूर है तुम्हे भी व मुझे भी मेरा अस्तित्व...??
जन्म जन्म से  चला आ रहा धीमे धीमे पकता पनपता,सिमटता,उबड़ता दर्द की कारुन्यता को पहले दिल फिर दिमाग तक ताउम्र चीरता फिर भी सहता हुवा  तन्हाइयों की चादर में रोज जन्मता वही सवाल....!!
जिंदगी दर जिंदगी  बिन पलको के सोए परम्परा के दस्तावेजों  को भी दांव पर लगाता व इतिहास से  चीखकर पूछता ... बता राधा कौन थी...???
सारे शास्त्र वेद पुराण उपनिषद बस खामोश... सुनकर वे भी बोल पड़े.. बता राधा कौन थी ...??? *** - वृषाली सानप काले

मैं राधा हूँ

मैं राधा हूँ ****************** जिंदगी के शीशे पर  सदैव अनवरत दस्तक देती  ही जाती है उसके अश्को की बूंदें...
बरसाती बारिश में  वक्त की बेड़ियाँ पहन मन के भय और पीड़ा की जुगलबंदी में  घुलकर एक हो जाती है.. उसके लकीरों की बूंदे...!!
वो सब वो .. सदियों से  लिखना चाहती है पर न भाव जुटते,  न वृत्त अलंकार मात्रा के टुकड़े मिलते.
कालचक्र के बवंडर में वो तो बस चलती रही। विरहिनी न होते हुवे भी विरहिनी कहलाती रही...!!
परमात्मा के आदेश नुसार कर्मपथ पर बढ़ती रही.. एक युगभर कृष्ण के  कांधे पे सर रख  बेदाग दर्द पीड़ा को भूलती रही..पर न बही  एक भी बून्द...!!
आसमान की घटाओं से  वनों की लतिकाओ से मासूम फूलों की पंखुड़ियों से शहतूत की कोंपलों से चंपा-चमेली के पराग से मधुमालती की सुगन्धों से प्यार करते बहाती रही अपने अश्को की बूंदें ...!!
निराकार की कलम से भावना की कुलबुलाहट में  कर्मयोगिनी की आवाज में सात्विकता की सादगी से बस कहना चाहती है उसकी अव्यक्त बूंदे...!! मैं राधा हु...!!मैं राधा हूँ...!! ** - वृषाली सानप काले