कश्मकश है क्या लिखू (For Blessing)

कश्मकश है क्या लिखू
- Kaushalya


लिखू तो मैं क्या लिखू ,
तुम्हारे नाम......
ये खुला आश्मान लिखू ,
या तारो से झग-मगाती हुई रात लिखू....
फूलो की महक लिखू ,
या हवाओं की रवानी लिखू....
तुम्ही कहो अब मैं क्या लिखू....
सोचा है की,....
सूरज की पहेली किरण का सलाम लिखू,
देखो तुम्हारी राह में,.....
इन्तज़ार करते हुए पहाडों की मृदंग नाद लिखू,
किल-किलाहत करती हई नदियों की मुस्कान लिखू,
या समन्दर की गहेरायी लिखू,
मौसम में तुम्हारे आने की खुशबु का पयाम लिखू,
या तितलियो का मेघ-धनुषी रंग लिखू....
उषा के फैले आशमान में,
रंग-बे-रंगी रंगों की सौगात लिखू,
या चाँद की रोशनी से बनी हुयी आभा लिखू....
देखो ना,....
आदित्य की कुंदन जैसी किरण,
जैसे सृष्टि में नवचेतना भर देती है,
वैसे ही,......
आज का ये दिन जीवन में नव-पल्लवित सवेरा लाये....
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