ईश्वर का अस्तित्व

[1]
ईश्वर का अस्तित्व
- Kaushalya
जहाँ सवाल उठता है की....
ईश्वर की सत्ता की अस्तित्व है भी या नहीं....
वहां अन्दर से एक आवाज़ आती है....
की पता नहीं.
नजाने लोग क्या सोचते है,
हम क्या सोचते है
फिर भी....
हम उसकी मौजूदगी को नकारते नहीं....
क्योकि वो अपनी अनुभूति करवा कर ,
हमारे एहसास में जिन्दा हो जाता है.
पता नहीं....दुनिया किसके नेतृत्व पर चलती है
मालूम नहीं कोन है इसका कर्ता,
कोन संभालता है इसके शासन की बागडोर को....
वो अपनी अनुभूति की प्रतीति क्यों करवाता है.
जब की हमने उसे देखा नहीं...सुना नहीं...
फिर भी हम उसकी हाजरी को नकारते क्यों नहीं...
वरण सहर्ष स्वीकार करते है,
और उस पर ही सब छोड़ देते है...
क्यों....
आखिर क्यों....
*
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[2]
ईश्वर की पहचान
- Kaushalya

ईश्वर शायद
इस प्रकृति में बसा हुआ है....
हमारी अनुभूतियों में है...
नदियों की लहेरो में है....
गाते हुए पंछियो में है....
धरती की मिट्टी में है....
फोलों की खुशबू में है...
चाँद की रोशनी में है...
तारों की टीम-टीम में है...
पेड़ - पौधों में है....
बारिश की बूंदों में है...
लहराते हुए खेतो में है...
दिलों की धड़कन में है....
सूरज की किरणों में है....
ईश्वर शायद,
सर्व व्यापक है...
वो कण-कण में समाया हुआ है।


*

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