बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

बरखा : मौसम-ऐ-शरारत
- Kaushalya


  • करवट बदली मौसम ने,
  • और अंगडाई ली हवाओं ने
  • लहरायी चुनरियाँ बदलो ने,
  • आसमान में फैलाया आँचल
  • धरती ने सज़ा रूप नया
  • चारों तरफ फैली हरियाली
  • देखो वो....
  • उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे
  • बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया
  • पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया
  • मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे
  • शरारत तो देखिए मौसम की,
  • झूमता हुआ सावन आया
  • याद ले आई आपकी
  • मन चाहे कि....
  • ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ
  • ले आए आपको हमारे पास
  • और मेघ बन बरसे आप का स्नेह
  • बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार
  • जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए
  • मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ,
  • कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की।
  • मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ
  • आया सावन चित्त चुराने
  • प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन
  • आयी ऋतु रंग सजाने की,
  • प्रकृति से मन तक पहुँचने की।
  • ***

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