बंजारा मन


शिकायत है कि ध्यान भटकता है हमारा,
कोई बताए उनको कि भटकन ही जीवन
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जीवन का सार निचोड़ कर देखा तो पाया,
कभी यहाँ तो कभी वहाँ भटकते फिरे हम

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कभी दिल ने कहा, कभी दिमाग ने कहा,
चल यहाँ मेरे संग, यही तो तेरी मंज़िल है

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हकीक़त के आईने ने कहा मैं तो तेरे पास,
मुझे ढूंढने क्यों भटके इधर उधर लौट आ

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तेरा हेतु तो सिर्फ़ मुझे है पाना जाना कहाँ, 
मैं तेरे अंदर हूँ चीर काल से जरा झांख खुद में 

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- अनामिका 

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