क्या पाओगे

छल्ली करके दिल को मेरे,
हाय रे क्या पाओगे....
***
मेरे आंसूओं में भीगो कर दामन अपना,
जाने क्या ले जाओगे...
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खिन्न हुआ आज मन बहुत,
मेरे हालत से क्या पाओगे....
***
दिल घायल पंछी सा तड़पता है,
झुलसता छोड़ क्या पाओगे...
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जन्नत की तो ना थी ख्वाहिश मुझे,
बेमौत दे कर क्या पाओगे...
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कुचल कर अरमानों की नगरी,
बेकरार कर क्या पाओगे....
***
- अनामिका 

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