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Showing posts from November, 2018

निराकारी लौ

वे  टाली पे टाली  बजा रहे थे, खुद ही खुद की लाल किये जा रहे थे..!!
कितनी खूबसूरती से उसे रास्ते से हटा दिया... सोच सोच हसे जा रहे थे...!!
..  कितने नादान है वे... हम भी सोच रहे थे..!! जब हम कभी भी  किसी के राहों में खड़े ही नही थे..!!
जब हम किसी को वैरी मानते ही न थे..!! किसी के न आगे जाना था न किसी के हम पीछै थे..!!
हमे कोई क्या हटाये... हम तो अमिट बने थे...!! सबको समाने वाले, सबको जिलाने वाले हम एक निराकार लौ थे...
रास्ते से हटते नही रास्ते को भी हटाते नही.. हम तो खुद रास्ते बनाते है...!!

- वृषाली सानप काले

Treasure of Heart

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Treasure Of Heart - Kaushalya
''Always Keep smiling like these flowers
As the colors of these flowers,
Fill deep color in your life ...
So many obstacle will comes in your ways ...
But you keep smiling like these flowers ....
Being in the thorns do not leave flowers smile
you remain spread like this fragrances of the flower
All their flavor, the mind is happy ....
Even if the person, or God, or any mere creature,
The fragrance of these flowers, like all of the soul is satisfied,
Same as like your "smile"....
Flowers are delicate and soft, so you
Keep your heart's feelings the soft ....
So that whoever you met
That "you" to be ...."
*

मन का खज़ाना

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मन का खज़ाना - Kaushalya
'इन फूलो की तरह मुस्कुराते रहना हर दम....
इन फूलो के रंग जैसा,
रंग भरना अपनी जिंदगी में गहरा...
काँटे तो अनेक आयेंगे राहों में,
पर आप मुस्कुराते रहना....इन फूलो की तरह....
फूल काँटों में रहकर भी मुस्कुराना नहीं छोड़ते,
आप इन फूलो की खुश्बू की तरह महकते रहना....
जो सब को अपनी परिमल से, प्रसन्न चित्त करता है ...
चाहे वो इन्सान हो,या परमेश्वर, या कोई भी जीव मात्र,
ये फूलो की महेक, जैसे सब को आत्मा-तृप्त करती है,
वैसी ही आपकी "मुस्कुराहट" हो....
फूल जैसे नाजुक और कोमल होते है, वैसे ही आप
अपने ह्रदय की भावनाओ को "कोमल" रखना...
ताकि जो कोई भी आप से मिले
वो "आपका" हो जाये....' *

अनुरोध (My Insistence For You)

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अनुरोध (My Insistence For You) - Kaushalya
तुम अपना जीवन शुद्ध जीना, तुम्हारी राह में जो कोई भी आए,
और मदद का हाथ फैलाये,
तो उसकी मदद करना ऐ दोस्त,
चाहे बस यही एक वादा तुमसे,
दे दो या ठुकरा दो हमारी गुजारिस को,
शिकवा नही करेंगे कोई तुमसे,
ये जीवन है कुंदन जैसा ,
गवाना मत्त उसे, क्योंकि....
कल ये मौका फ़िर मिले न मिले।~*~

Student Life Is The Golden Period Of Life

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Student Life Is The Golden Period Of Life ( विध्यार्थी अपने आप ही अपने भविष्या का निर्माण करे ) विध्यार्थी जीवन , जीवन का सुवर्णकाल है Student Life Is The Golden Period Of Life. कुच्छ सीखने को , कुच्छ बनने का निरंतर प्रयास इस समय मे ही होता है एक विध्यार्थी के क्या लक्षण होते है , यह नीचे के श्लोक मे दिए गये है ------ " काकचेष्टा बकध्यानम श्वाननिंद्रा तथैव च । अल्पाहारी गृहत्यागी विध्यार्थी पन्चलक्षम ॥ " [1] काक (कौआ) चेष्टा :- कौआ दूर आशमान मे स्वच्छंदता से उड़ाता रहता हो फिर भी उसकी तीव्र द्रष्टि द्वारा ज़मीन पर पड़ी हुई कोई खाध्यपदार्थ को देख कर चपलतापूर्वक वहाँ पहुँच जाता है तथा अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। एसे ही विध्यार्थी भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए तीव्र जिज्ञासा रखे तथा अपना लक्ष्य को प्राप्त करता जाय । [2] बकध्यानम :- बगुला (Heron) तालाब या नदी किनारे एक पैर (Leg) पर खड़ा रहकर ध्यान मग्न रहता है। मछली देखते तुरंत ही उसे झपट कर अपना आहार बनता है , फिर दुबारा ध्यानस्थ मुद्रा मे हो जाता है। विध्यार्थी भी विद्या अध्ययन में लगे रहे तथा ज्ञान-विज्ञान की बातों को ग्रहण करता…

पॉवर ऑफ वायब्रेशन्स

मेरे  साथियों हो सकता है मेरी बात आपको विचित्र भी लगे तथापि यह सत्य की ताकत है। मेरी स्वयं की रोजाना की अनुभूति है..!! जी हाँ...!! वायब्रेशन...!! वायब्रेशन... में बेहद की ताकत होती है, है ही...!! क्या है जीवन तथा क्या है मनुष्य की जिंदगी...?? केवल वायब्रेशन का ही तो खेल है। वायब्रेशन ही तो दुवा भी देते है..., बद दुवा भी देते है.. जलसी भी देते है.. अपयश भी देते है.. यश भी..! ताकत भी देते है.. कमजोरी भी..!! बीमारी भी देते है.. ठीक भी करते है...! जिंदगी भी देते है.. मौत भी...!! जी,बिल्कुल कटु सत्य...!! जिससे सारी दुनिया अनभिज्ञ है।
दुनिया केवल देह व देह की बाते जानती है। देह से परे नहींं। परन्तु सारा जीवन का खेल तो देह से परे दुनिया के असर से ही प्रभावित है..!! मनयुष्य के मन के विचार उसकी पंचेन्द्रियों द्वारा सदैव बाहर अर्थात देह से बाहर निकलते ही रहते है। वो फिर निकलकर जिसके संपर्क में आते है उनके साथ निकल जाते है। विचार शक्ति ही तो आत्मा की प्रमुख शक्ति होती है। जो संकल्प, संस्कार, कर्म व बुद्धि की परिचायक होती है..!! जो पूर्व जन्म कर्म व संस्कार से सदैव प्रभावित होती है। परिणामता अगर कि…