उधार दे

मुझपर एक एहसान तू ही कर दे ज़रा..
जिंदगी दर्द ही उधार सा दे दे जरा..!!

साहिल की दिशाओ का नही ऐ तबार यहाँ..
काँच के फर्श पर ही चला दे ज़रा..!!

शहजादी जिंदगी के तो झमेले हजार है..
तनहाई के तूफ़ान की करवटें बदल दे जरा..!!

समतल बना ये जीवन लगता है बोझल सा..
गुस्ताखे गमे आवाज ही तू सुनादे जरा..!!

खुशियो का न रहता है पहरा मेरी देहलीज पर..
संवेदना का ताज मुझे पहना दे ज़रा..!!

प्यास बुझती ही नही रे खुशियो को पिने से..
तेरी मधुशाला में अब गमकी पिला दे हाला जरा..!!

है इकरार गमे इश्क का नही जाता नशा..
दर्द का कर्जा ही अब बढ़ा दे जरा..!!

- वृषाली सानप काळे

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