मिसाल बने

इंसान पूरी जिंदगी बस दुसरो का अनुकरण व भाव ही पढ़ने का प्रयास करता रहता है।क्यो उसकी अपनी जिन्धी दुसरो की सलाह व विचार पर आश्रत हो जाती है..??

   दूसरा व दूसरे ...इस परिभाषा से बाहर आने की बहोत जरूरत है...!!क्योँकि किसी भी चीज के लिए किसी का उदाहरण देना बहुत सरल है लेकिन किसी के लिए खुद उदाहरण बनना बहुत ही मुश्किल है..!!इसीलिए जीवन मे उदाहरण नाही दो खुद उदाहरण बन जाओ..!!

     दुसरो की तस्बीरों के आगे तो सब झुकते भी है व पूजते भी है,आओ कुछ ऐसा करे कि लोग हमारी तसबीर को भी महान मानने लगे..!!

    लोगो को सब टालते है,जब उनकी मौजूदगी उन्हें तकलीफ देने लगे।हम ऐसे बने की लोगो को हमारी मौजूदगी से शक्ति महसूस हो...!!

   सदियों से यही तो चाह हम रखते आये की हमे ये मील हमे वो मील,हमारी किस्मत ऐसी हो,हमारे भाग्य में वो हो ।हम भाग्यशाली बने..!!अपने भाग्य में किसीसे कुछ उम्मीद रखने के बजाय अगर हम ही दूसरों का भाग्य बना  देंगे तो...!!क्योँकि भाग्यशाली वे लोग कभी  नही होते है जिन्हें सबकुछ अच्छा मिलता है बल्कि भाग्यशाली तो वो होते है जिन्हें जीवन मे जो भी मिलता है ,जितना भी मिलता है,तथा जैसा भी मिलता है,उसे ही वो बेहद अच्छा बना लेते है...की हर कोई वैसे भाग्य की आस लगाए..!!

    जीवन तो वो होता है जैसा चाहत का पानी होता है।अगर ये चाहत का पानी अमृत हो तो जीवन अमृत होता है ,तथा अगर ये जल जहर हो तो जीवन भी जहर हो जाता है...!!

सुख व दुख ये तो विचारों के सागर की,चिंता के सागर की गहरी खाई होती है..जिसमे जो गिर गया वो मिट गया या जिसमे जो तैरकर किनारे आया वो ही जीवन जी पाया तथा दूसरों को भी जीबन दे पाया...!!

खुद बेहद दर्द सहा व्यक्ति कभी किसीको दर्द दे ही नही सकता...क्योँकि दर्द की परिभाषा व पीड़ा को वो जितना जानता है ,शायद उतना कोई भी नही..!

   दुखी हुवा इंसान वास्तव में सच्चा होता है।संवेदन शील होता है ,इसी कारण वह दर्द लेता है।दुनिया की कोई शक्ति संवेदन शील व्यक्ति को दर्द देने की जुर्रत नही कर सकती..!!परन्तु ये दर्द उनके रुदय में जमाने के व्यवहार,अनीति व व्यर्थ वाममार्ग तथा बुराई के प्रति चिंतन से मौजूद होता है..!!जिस दिन वे इसका परिमार्जन करने का रास्ता ढूंढ लेते है..उनका दर्द नष्ट होता है..!!
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-- वृषाली सानप काले

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