रूहानी रिश्ते

रिश्ते जो जीवन को महक देते है। भले वो खून के हो या प्रेम के, भाव के हो या सद्भाव के, आह! से भरे हो या चाह से, स्नेह से पूरे हो या गेह से, वृत्ति से जुड़े हो या कृति से, नीति से भरे हो या गीति से, लेकिन कुछ रिश्ते....कैसे भी हो वो दिल के गहराई में घुले होते है। जग की समस्त शब्दकोशों से वो न्यारे होते है। भाव भंगिमा की ताकत के लहजे से परिपूर्ण होते है, जज्बात उनकी पहचान एवं ताकत होती है लेंन देंन जहां गौण होता है।

 व्यवहार की डिक्शनरी को वो कभी महत्व नही देते। फायदे से ज्यादा वो घाटे के सौदे को पसंद करते है। उन्हें सांतवां आसमान को पाने की चाह नही होती उन्हें बस दिलो के राजमहल की संपत्ति की चाह होती है। उन्हें वस्तुओं की कीमत नही तो रूहानी जज्बातों की कदर होती है।

  ये जज्बात ही उनकी ताकत, हिम्मत, वजूद होती है। जिनके लिए मिटना एवं बिकना भी उन्हें मंजूर होता है। ऐसे ही रिश्ते जीवन को अनोखा बना देते है। जीवन को अनमोलत्व प्राप्त करता देते है। ऐसे ही चंद रिश्ते...जो मेरे जिंदगी भर  की  पूँजी  है...जिंदगी की संपत्ति है...तथा सदैव रहेगी। जिन में हर कोई साशामि हो ही नही सकता। क्योँकि वो स्थान लेने की पात्रता हर किसी मे भी नही होती। ये स्थान न कोई मांगता है न कोई इसकी डिग्री होती है। ये तो रूह ने रूह को दी हुई एक असामान्य पद की ऊंचाई होती है। जो स्थान अपने आप सच्चाई युक्त भाव प्राप्त कर लेता है।ऐसे रिश्तों में ही शामिल हो पाता है वही तो अपना होता है।

  एक कड़वा सत्य ये भी है कि  रिश्ते वो बड़े नहीं होते जो जन्म से जुड़े होते है, या समाज के बनफहनो से जोड़े जाते है। रिश्तो में अगर गहराई न हो तो रिश्ते होकर भी न होने के बराबर है। जो रिश्ते मिलने की ताकत नही बढ़ा पाते जो रिश्ते प्यार को बरकरार नही रख पाते। जो रिश्ते दिल मे कसक पैदा नही कर पाते वो रिश्ते होकर भी न होने के समान है।

   रिश्ते तो वो बड़े होते है जो दिल से जुडे होते है! रूहानी दुवा तथा रूहानी प्रेम से सरोबार होते है। रूह की भावना ही उनकी ताकत होती है। 

- वृषाली सानप काले

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