क्या चाहते हो तुम

मुझे चाहकर मुझे देखकर
क्या पाते हो तुम जरा मुझे बोलो..!!

पल पल मेरा इंतजार कर
मेरे लिए दुवाए भी माँगकर..
क्या पाते हो तुम जरा मुझे बोलो..

हर अदा में सजदे करकर
बदले में तुम तो आहे पाकर..
क्या पाते हो तुम जरा मुझे बोलो..!!

तौहीने वफ़ा मुझपे लुटाकर
अश्को की माला मेरी अपनाकर
क्या पाते हो तुम जरा मुझे बोलो..!!

चाहसे इकरार भी ना मंजूर
फिर भी उल्फते जफ़ा मगरूर
क्या पाते हो तुम जरा मुझे बोलो

तेरी चाहते से अब हमे लागे डर
तेरी वफाये इश्क से हारकर
इकरार कर न जाए थककर ...
यही चाहते हो तुम ना मुझे बोलो..!!

- वृषाली सानप काळे

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