नौकरी

योग्यता थी कम कभी वैकेंसी खत्म
 बेरोजगारी की पीड़ा में,  
आँखे होती नहीं  नम
बढ़ते रहे हम, कदम दर कदम 
प्रयास की गिनती नहीं हुई है कम
अधरों की मुस्कान खोने लगी 
उत्साह  में भी कमी होने लगी
उज्ज्वल कल में घुट रहा वर्तमान
फल की आशा कर दूँ बलिदान...??

- अज्ञात

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