हिन्दी दिवस 14 सितम्बर 2018

 तेरे जखमो को सिने मे हमने तो छुपाया है
तेरे अशको को लहू सा हमने तो पी लिया है...!!

'तेरी पहचान हम नहीं हमारा वजूद है तू
'तेरी अरदास हम नहीं हमारा खातून है तू...
सारी दुनिया मे तो हमको तुमने ही जिलाया है...!!

ये भोले पगले है जगवाले खरे सोने को धुतकारे
ये बुरे होते है फितवाते मिटाते है जो उजियारे...
स्व मान का सिक्का तेरी टकसाल मे बनाया है...!!

आजादी ये आजादी 'तेरी एहसान सदीयो ही
बरबादी न हो जाये 'तेरी न ईबादत होईयो जी..
ऐ हिंदी तू भाषा ना राष्ट्र जननी ही गाया है...!!
तेरे कदमो मे सदीयो ही हमने सर झूकाया है...!!

वृषाली सानप काळे

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