श्याम का आना (ग़ज़ल)


¶ विधा - ग़ज़ल/गीतिका
¶ काफिया - आना
¶ रदीफ़ - बन गया

**************************************
(श्याम को समर्पित भाव)

तेरे आने से सारा आलम, श्याम सुहाना बन गया,
तेरी सांवली सूरत देख, मेरा दिल दीवाना बन गया


तेरा मंद-मंद मुस्कुराना मेरा दिल हुआ चोरी बस,
तेरी जुबां से निकला हर लफ्ज़ इक तराना बन गया

तेरी नज़र का मिलाना, घायल हुआ मेरा दिल,
तेरा ये अंदाज कान्हा मेरे नयन छलकाना बन गया

तेरा साँसें चलाना मेरे चित्त को महाकाये जाए है,
तेरा नाम गुनगुनाना श्याम मेरी धड़कन का फ़साना बन गया

तेरी बाँसुरी सुनाना मेरे सोए भाग जाग जाए श्याम,
तेरी यादों का झिलमिलाना मुझे रुलाना बन गया

*********************************

- कौशल्या वाघेला

Comments

Popular posts from this blog

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा की विशेषताएं

संस्कृत भाषा के शब्द भंडार से सम्बंधित बातें

इम्तिहान